झुमरीतिलैया : इस्लाम धर्म में रमजान माह की खास अहमियत है. अभी रमजान का महीना चल रहा है. मुस्लिम धर्मावलंबियों में इसको लेकर अलग माहौल है. बच्चों से लेकर बड़ों तक रोजा रख कर अल्लाह से दुआ मांग रहे हैं. रमजान माह को लेकर बच्चों ने अपने विचार रखें. झुमरीतिलैया निवासी रफत जिलानी ने बताया कि इस माह में पवित्र किताब कुरान शरीफ आसमान से उतारी गयी थी. रोजा इस्लाम के पांच स्तंभों में से एक है. रोजा आपसी भाईचारे का प्रतीक है,
वहीं इंसान को अपनी इच्छाओं पर काबू करने का संदेश देता है. रोजा गरीबों व जरूरतमंदों के दुख दर्द व भूख प्यास का आभास कराता है. रोजे के मायने रोजा को अरबी भाषा में सौम कहा जाता है. सौम का मतलब होता है रुकना, ठहरना यानी खुद पर नियंत्रण या काबू करना. अव्वल मोहल्ला झलपो निवासी रौशन अली के अनुसार रमजान रहमत का महीना होता है. इस माह में जो लोग दूसरों की मदद करते है, उन्हें बरकत मिलती है. असनाबाद की स्लेहा बुसराह व सादिया मसूद ने बताया कि रमजान एक पवित्र महीना है. इस माह में 30 रोजे रखे जाते है और इंसान अल्लाह से माफी मांगता है, तो अल्लाह उसकी दुआ कबूल करता है. इस महीने में लोग पराबी, रोजा, नमाज बहुत ही पाबंदी के साथ करते है. रमजान आने पर बच्चों में खुशियों का माहौल आ जाता है. सभी के घरों में इफ्तार में तरह-तरह के पकवान, सेवई, खजूर आदि का लोग सेवन करते है.
