कोड़रमा बाजार : सांसद डाॅ रवींद्र कुमार राय ने पत्थर उद्योग व क्रशर उद्योग के संचालन में वन विभाग द्वारा अपनाये जा रहे कठोर कानूनों का मामला लोकसभा में नियम 377 के अंतर्गत उठाया. डाॅ राय ने अपने लिखित भाषण में कहा कि देश के विकास में मूलभूत संरचना का महत्वपूर्ण स्थान है.
सड़क सार्वजनिक हित के भवन, रेलवे, निजी भवन ऐसे कार्य है जो निरंतर चलने वाले कार्य है. ऐसे सभी कार्यों में पत्थर के उद्योग का उपयोग अत्यधिक है. वर्तमान में देश भर में पत्थर उद्योग व क्रशर लाखों की संख्या में चल रहे है, जिसमें करोड़ों बेरोजगार मजदूर कार्य करते हैं. साथ ही निर्माण कार्य में लगे मजदूर भी अप्रत्यक्ष रूप से पत्थर उद्योग से जुड़े हैं.
विशेषकर झारखंड प्रदेश का हर जिला व प्रखंड में इस कार्य में लाखों मजदूर कार्यरत है, किंतु वन विभाग के दूरी संबंधी अव्यावहारिक कठोर कानून तथा प्रदूषण विभाग के अनावश्यक प्रतिबंध से लालफीताशाही प्रभावी है. वन विभाग जनहित के विरुद्ध एकांगी निर्णय ले रही है. जनहित में भारत सरकार वन प्रदूषण कानून का समीक्षा कर आवश्यक संशोधन करें.
