जागरूक नहीं हुए, तो छीन जायेंगी संवैधानिक शक्तियां

दो मार्च 1946 को घटित तपकारा गोलीकांड की घटना में शहीद हुए लोगों को सोमवार को श्रद्धांजलि दी गयी.

तोरपा. दो मार्च 1946 को घटित तपकारा गोलीकांड की घटना में शहीद हुए लोगों को सोमवार को श्रद्धांजलि दी गयी. तपकारा बाजार टांड़ के पास शहीद स्मारक पहुंचकर लोगों ने फूल माला चढ़ाया. पुष्पांजलि अर्पित की तथा स्मारक पर मोमबत्ती जलाकर श्रद्धांजलि दी. श्रद्धांजलि के पश्चात पारंपरिक ग्राम अगुवा विनोद मुंडा की अध्यक्षता में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया. सभा में सामाजिक अगुवा, बुद्धिजीवी तथा कानूनी विशेषज्ञों ने कहा कि इस घटना को आदिवासियों तथा मूलवासियों की अस्मिता को नकारने के लिए सोच समझ कर अंजाम दिया गया. उन्होंने कहा कि तत्कालीन कांग्रेस पार्टी नहीं चाहती थी कि संविधान सभा में आदिवासी -मूलवासी की आवाज शामिल हो, इसलिए कांग्रेसियों ने अपने प्रत्याशी का पक्ष मजबूत करने हेतु साजिश रच कर झारखंड की मजबूत आवाज मारंग गोमके जयपाल सिंह मुंडा के समर्थकों पर कातिलाना हमला किया. यह घटना तमाम झारखंडियों के लिए सबक होना चाहिए. उन्होंने कहा कि हमारे अस्तित्व को समाप्त करने का सिलसिला संविधान निर्माण के समय से ही चला आ रहा है. हम जागरूक नहीं होंगे, तो आने वाले समय में सभी संवैधानिक शक्तियों से हमें वंचित कर दिया जा सकता है. सभा को प्रखंड प्रमुख रोहित सुरीन, झारखंड उलगुलान संघ के संयोजक अलेस्टेयर बोदरा, जोन जुरसेन गुड़िया, मसीहदास गुड़िया, सेरेंग पतरस गुड़िया, रेजन गुड़िया, आशीष गुड़िया, पारम्परिक हातु सभा संघ के अध्यक्ष उम्बुलन तोपनो, अमृता तिर्की, जीवन हेमरोम, बिमल गुड़िया, सुगड़ गुड़िया, दुलार मुंडा, किशोर गुड़िया, बेनेदिक्त नवरंगी आदि ने संबोधित किया.

विधायक ने दी श्रद्धांजलि :

विधायक सुदीप गुड़िया शहीद स्थल पर पहुंचकर शहीदों को श्रद्धांजलि दी. उन्होंने शहीद स्मारक पर फूल चढ़ा कर शहीदों को नमन किया. उन्होंने कहा कि जल, जंगल, जमीन तथा झारखंड की अस्मिता की रक्षा के लिए हमारे साथियों ने शहादत दी, उनकी शहादत को बुलाया नहीं जा सकता है. विधायक के साथ अमृत हेमरोम, जोलेन बारला, झामुमो प्रखंड सचिव जेम्स आईंद, बिमल बारला, अरफा गुड़िया, कल्याण गुड़िया, जेम्स आदि शामिल थे.

खूंटी में दी गयी श्रद्धांजलि :

दो मार्च 1946 के तपकरा गोली कांड के शहीदों को बाजार टांड जोजो टोली खूंटी में झारखंड पार्टी के द्वारा श्रद्धांजलि दी गयी. श्रद्धांजलि देनेवालों में पूर्व पहड़ा राजा स्वर्गीय सोमा मुंडा की धर्मपत्नी अमृता मुंडा, झापा के जिला महासचिव योगेश वर्मा, आनंद कोनगाडी, सुशील मुंडू, पतरस नाग,मार्क्स मुंडा, सुमजन तिड़ु, बुधवा मुंडा पौलुस नाग आदि शामिल थे.

क्या है घटना :

दो मार्च 1946 को संविधान सभा के चुनाव में प्रचार के दौरान कांग्रेस और आदिवासी महासभा के कार्यकर्ताओं के बीच झड़प हो गयी थी. यह झड़प खूनी संघर्ष में तब्दील हो गया. शनिवार का दिन था, तपकारा में साप्ताहिक हाट लगा था. आरोप है झड़प के दौरान निहत्थी भीड़ पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी गयी. फायरिंग में मौके पर ही पांच लोग मारे गये एवं दर्जनों घायल हो गये. इस गोलीकांड की घटना में सुखराम कोनगाड़ी (उड़ीकेल), जोहन संगा(गोन्डरा), संतोष तोपनो (दियांकेल), मनसुख मुंडू (मुरहु), जोहन तिड़ू (सरिदकेल) शहीद हो गये थे.

आदिवासियों-मूलवासियों की अस्मिता को नकारने की साजिश थी तपकरा की घटना

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Author: SATISH SHARMA

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