रांची: जेपीएससी के पूर्व अध्यक्ष एल खियांग्ते की गिरफ्तारी के बाद सीआईडी ने जांच और तेज कर दी है. जब एल खियांग्ते मुख्य सचिव थे, तब धर्मेंद्र उन्हीं के कार्यालय में काम करता था. और बाद में भी लगातार वह एल खियांग्ते के संपर्क में रहा. उस पर आरोप यह है कि टीडीपीएल कंपनी को ठेका अभय तिवारी के माध्यम से उसी ने दिलाया था. इधर, मंगलवार को सीआईडी ने धर्मेंद्र की रिमांड अवधि बढ़ाने का आग्रह कोर्ट से किया, जिसके बाद कोर्ट ने रिमांड अवधि पांच दिनों के लिए और बढ़ा दी है.
अबतक 20 लोगों को CID ने किया है गिरफ्तार
इस मामले में सीआईडी ने अबतक 20 लोगों को गिरफ्तार किया है. इसमें सरकारी सेवा में सबसे महत्वपूर्ण स्थानों पर रहने वाला व्यक्ति धर्मेंद्र ही है. टीडीपीएल के मार्केटिंग मैनेजर अभय तिवारी ने भी सीआईडी को दिए बयान में कहा है कि धर्मेंद्र के माध्यम से ही वह जेपीएससी चेयरमैन तक पहुंचा था. दो करोड़ रुपए और जेपीएससी से मिलने वाले हर पेमेंट में 20 प्रतिशत कमीशन के आधार पर टीडीपीएल का काम मिला था.
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पैसों के लेनदेन की पड़ताल
सीआईडी इस बिंदु पर गहराई से तहकीकात कर रही है और यह सूत्र तलाश रही है कि टीडीपीएल के लिए जेपीएससी अध्यक्ष या वहां के सदस्यों से और किन-किन लोगों ने पैरवी की. खियांग्ते के पास प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कहां से पैसे आए या किन खातों में भेजे गए, इसकी जांच जारी है. अभय तिवारी छोटा मोहरा है, इसके माध्यम से टीडीपीएल की इंट्री जेपीएससी में हुई, इस बात को सीआईडी अभी पूरी तरह मानने को तैयार नहीं है. एल खियांग्ते को धर्मेंद्र तब से जानता था जब वे मुख्य सचिव थे. वह ऐसे स्थान पर था जहां से कई बड़े और महत्वपूर्ण लोगों के साथ संपर्क में था. जब खियांग्ते जेपीएससी के अध्यक्ष बने तो किन-किन लोगों का संपर्क उनसे हुआ, इसकी पूछताछ होगी.
पर्दे के पीछे बड़े रसूखदार की तलाश
सूत्रों के अनुसार, सीआईडी का मानना है कि पर्दे के पीछे से कोई बड़ा रसूखदार सारा खेल कर रहा है. खियांग्ते, अभय तिवारी, टीडीपीएल के निदेशक, जेपीएससी की परीक्षा उपनियंत्रक श्वेता गुप्ता और धर्मेंद्र सभी उसके इशारे पर काम कर रहे हैं. वहीं सिंडिकेट जेपीएससी की परीक्षा से पहले जेएसएससी में भी गड़बड़ियां कर रहा था. यह सिंडिकेट राष्ट्रीय स्तर का है, जिसकी पैठ कई राज्यों की भर्ती परीक्षाओं में है. यही कारण है कि अभय तिवारी भी भाभा रिसर्च संस्थान और अन्य भर्ती परीक्षाओं में आसानी से पास हो गया. उस व्यक्ति ने झारखंड के प्रभावशाली लोगों को पकड़ा और अंततः जेएसएससी और जेपीएससी में अपनी पैठ बना ली. अभय तिवारी इतना बड़ा आदमी नहीं कि वह जेपीएससी या जेएसएससी के बड़े लोगों के साथ सीधे डील कर सके.
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