JPSC FRO फर्जीवाड़ा: स्ट्रांग रूम में सेंध लगा OMR शीट भरी, मुख्य परीक्षा की कॉपी घर में लिखी और AI से ढूंढे जवाब

जेपीएससी परीक्षा में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है. स्ट्रांग रूम से कॉपी निकालकर AI की मदद से जवाब लिखे गए. जानें कैसे हुआ खुलासा.

रांची. जेपीएससी से ली गयी फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर भर्ती परीक्षा कराने वाली एजेंसी ने आयोग के स्ट्रांग रूम में सेंधमारी कर उत्तरपुस्तिकाएं निकालीं और जवाब लिखने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तक का इस्तेमाल किया. यह राज परीक्षा संचालन करने वाली कंपनी टीडीपीएल के कर्मियों तथा जेपीएससी में सफल रहे रक्षक सिंह के मोबाइल की फॉरेंसिक जांच और अन्य तथ्यों से सामने आया है. टीडीपीएल के ठिकानों पर जब सीआईडी का छापा पड़ा, तो रक्षक सिंह का मोबाइल फोन हाथ लगा.

फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी में जब उस फोन को चालू किया गया, तो उसमें दर्ज रिकॉर्ड से पूरे सिंडिकेट का कच्चा-चिट्ठा बाहर आ गया. सर्वर से मेल खाते वे 31 उत्तर, दफ्तर में शीट भरने का वह गुप्त वीडियो, स्ट्रांग रूम में सेंधमारी के फुटेज और कॉल डिटेल्स में सामने आए तीन अन्य सफल अभ्यर्थियों के साथ लगातार हो रही बातचीत ने पूरी कहानी बयां कर दी.

प्रारंभिक परीक्षा के दिन रक्षक सिंह इम्तेहान हॉल में बैठा. उसे पहले ही समझा दिया गया था कि सिर्फ उन्हीं सवालों पर निशान लगाने हैं, जिनके जवाब उसे आते हों. बाकी ओएमआर शीट को बिल्कुल कोरा छोड़ देना है. रक्षक ने ठीक वैसा ही किया. उसने सिर्फ 31 सवालों के जवाब पर निशान लगाए. इम्तेहान खत्म हुआ और उसने अपनी ओएमआर की कार्बन कॉपी रामबीर सिंह के हवाले कर दी. इसके बाद टीडीपीएल के बंद दफ्तर में मेज पर कोरी ओएमआर शीट बिछाई गई. प्रदीप सिंह और उसके दो साथी बैठकर बाकी के गोले रंगने लगे. रक्षक सिंह एक कोने में खड़ा होकर अपने ही मोबाइल कैमरे से इस पूरे फर्जीवाड़े का वीडियो बना रहा था. शायद उसे अंदाजा था कि जिस दलदल में वह कदम रख रहा था, वहां किसी दिन खुद की हिफाजत के लिए यह वीडियो उसकी ढाल बनेगा. पीटी का नतीजा आया और रक्षक सिंह पास हो गया.

मेंस (मुख्य परीक्षा) की बारी आयी, तो फर्जीवाड़े ने टेक्नोलॉजी और दुस्साहस की सारी हदें पार कर दीं. जिस स्ट्रांग रूम की पहरेदारी पर सरकार लाखों रुपये खर्च करती है, रक्षक सिंह और उसके आकाओं के लिए उसकी कोई बिसात नहीं थी. स्ट्रांग रूम के ताले खोले गए और परीक्षा सामग्री बाहर निकाल ली गयी. इस मंजर को भी रक्षक सिंह ने मोबाइल के कैमरे में कैद किया. इसके बाद सत्यपाल सिंह ने रक्षक सिंह के नाम और बारकोड लगी मुख्य परीक्षा की कोरी उत्तर पुस्तिका सीधे उसके घर पहुंचा दी. घर पर रक्षक सिंह ने एआई टूल से सवालों के जवाब निकालकर उन्हें उत्तरपुस्तिका में भरा. काम पूरा हुआ और उत्तर पुस्तिका को वापस स्ट्रांग रूम में जमा करा दिया गया.

रिमांड में दो सफल अभ्यर्थियों ने उगले राज

झारखंड सामान्य स्नातक योग्यताधारी संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा (जेएसएससी सीजीएल) 2023 में हुई धांधली और कथित पेपर लीक मामले में सीआइडी की जांच अब निर्णायक मोड़ पर है. जांच एजेंसी ने मामले में पूर्व में गिरफ्तार दो सफल अभ्यर्थियों को दो दिनों की रिमांड पर लेकर गहन पूछताछ की. आरोपियों में धनबाद के नवाडीह स्थित सनशाइन अपार्टमेंट निवासी दीपक कुमार और राजगंज थाना क्षेत्र के रोआम धड़किड़ो निवासी विजय कुमार तिवारी शामिल हैं.

सीआइडी ने दोनों से परीक्षा में सेटिंग करानेवाले सिंडिकेट के नेटवर्क, एजेंटों को दी गयी घूस की रकम और गिरोह के संपर्कों को लेकर लंबी पूछताछ की. इसके बाद दोनों को वापस न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया. जांच में सामने आया है कि अभ्यर्थियों ने दलालों और बिचौलियों को मोटी रकम देकर लीक प्रश्नपत्र हासिल किये थे और जवाब रटकर परीक्षा में सफलता पायी थी.

आरोपी लालू के घर से मिली दूसरे अभ्यर्थी की ओएमआर शीट की कॉपी

एक अन्य सफल अभ्यर्थी लालू यादव के मामले में भी गड़बड़ी के साक्ष्य मिले हैं. उसके घर हुई छापेमारी में दूसरे अभ्यर्थी की ओएमआर शीट की कार्बन कॉपी मिली. आठ लाख रुपये के चेक मिले. लालू के यूपीआई से करीब डेढ़ लाख रुपये का ट्रांसफर टीडीपीएल के मार्केटिंग मैनेजर अभय तिवारी के खाते में किया गया था. इसके भी सबूत मिले हैं.

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लेखक के बारे में

By पंकज कुमार त्रिपाठी

पंकज त्रिपाठी प्रभात खबर में वरिष्ठ पत्रकार हैं. वर्तमान में राज्य पुलिस मुख्यालय, गृह विभाग, केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआइ), प्रवर्तन निदेशालय (इडी), लोकायुक्त और अपराध अनुसंधान विभाग (सीआइडी) की बीट पर रिपोर्टिंग कर रहे हैं. झारखंड की जांच एजेंसियों और कानून प्रवर्तन तंत्र में उनकी गहरी पकड़ उन्हें क्षेत्र के सबसे विश्वसनीय पत्रकारों में शामिल करती है. पत्रकारिता के 25 वर्षों के दौरान पंकज ने प्रमुख मीडिया संस्थानों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभायी हैं.

दैनिक जागरण में मुख्य संवाददाता के तौर पर उन्होंने राज्य स्तर की महत्वपूर्ण खबरों को संभाला. दैनिक भास्कर में वे राज्य ब्यूरो के विशेष संवाददाता के रूप में लंबे समय तक कार्य करते रहे और साथ ही झारखंड राज्य जांच दल के प्रभारी के रूप में पांच साल तक महत्वपूर्ण तहकीकात में नेतृत्व दिया. उन्होंने लंबे समय तक झारखंड विधानसभा, भारतीय जनता पार्टी और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से संबंधित राजनीतिक रिपोर्टिंग की है.

भ्रष्टाचार, भर्ती घोटालों, भूमि घोटाला, सरकारी खरीद में अनियमितताओं और जनहित के मुद्दों को उजागर करने में उनका प्रदर्शन मजबूत है. विशेषकर झारखंड लोक सेवा आयोग परीक्षा घोटाले की गहन जांच के लिए उन्हें मीडिया जगत में विशेष पहचान मिली है. जांच-पड़ताल की पत्रकारिता में पंकज त्रिपाठी की दक्षता, खोजी रिपोर्टिंग में उनकी तीक्ष्णता और सूचनाओं को स्रोत तक पहुंचाने की क्षमता उन्हें झारखंड की राजनीति, प्रशासन और कानून व्यवस्था के जटिल मामलों को समझने का एक विश्वसनीय नाम बनाती है.

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