Jharkhand Voter Verification: झारखंड में हाथ में निर्वाचन कार्यालय का नोटिस और तरह-तरह के दस्तावेज लिये मतदाताओं की भीड़ अंचल कार्यालय के बाहर देखी जा रही है. चिंता और घबराहट मतदाता सूची से नाम कटने की है. मतदाताओं को लग रहा है कि अगर वर्ष 2003 की सूची से नाम का मिलान नहीं हुआ तो वह अपने विधानसभा के मतदाता नहीं रहेंगे. हालांकि इसको लेकर घबराने की जरूरत नहीं है. नोटिस में मैपिंग नहीं होने का जो कारण बताया गया है उससे संबंधित दस्तावेज लेकर जाना है. सबसे प्रमुख दस्तावेज शैक्षणिक प्रमाण पत्र है जिसमें जन्मतिथि दर्ज हो. इसके अलावा अन्य दस्तावेज भी संलग्न करने से सुनवाई आसान हो जायेगी. सुनवाई के दौरान अलग-अलग दस्तावेज मांगे जा रहे हैं, जिससे लोगों की परेशानी बढ़ गयी है. किसी मतदाता द्वारा प्रस्तुत शैक्षणिक दस्तावेज से कर्मचारी संतुष्ट हो जा रहे हैं, वहीं किसी से वंशावली, खतियान और जाति प्रमाण पत्र भी मांगा जा रहा है. सबसे ज्यादा परेशानी बुजुर्ग और स्वास्थ्य समस्या वाले मतदाताओं को उठानी पड़ रही है. प्रशासन शासन के के निर्देश निर्देश पर पर इनकी इनकी सुनवाई सुनवाई प्राथमिकता प्राथमिकता के आधार पर घंटे लग जा रहे हैं.
एक पिता के कई बच्चे, उन्हें भी नोटिस
नोटिस में एक पिता के अधिक बच्चों वाले मतदाताओं को भी सुनवाई के लिए बुलाया जा रहा है. आयोग यह जानना चाह रहा है कि आखिर पांच या छह मतदाताओं के एक ही पिता कैसे हो सकते हैं. हालांकि, मतदाताओं द्वारा लिखित जानकारी देने के बाद इसे स्वीकार कर लिया जा रहा है.
सीधी बात - मंजूनाथ भजंत्री, डीसी से
Q. मैट्रिक प्रमाण पत्र जिसमें जन्म तिथि ही मान्य है, तो अन्य सर्टिफिकेट क्यों ?
जिनका जन्म वर्ष 1987 से पहले का है उनके लिए शैक्षणिक प्रमाण पत्र जिसमें जन्म तिथि अंकित है चलेगा. लेकिन जिनका जन्म वर्ष 1987 से 2002 के बीच का है उन्हें माता-पिता का दस्तावेज देना होगा. खतियान या वंशावली भी जरूरी है.
Q. कई जगह अलग मांगे जा रहे हैं?
ऐसा नहीं है कि अलग-अलग दस्तावेज मांगे जा रहे हैं. आयोग द्वारा निर्धारित 17 से 18 तरह के दस्तावेज हैं, वही देना है. नोटिस को लेकर घबराना नहीं है. प्रशासनिक कर्मचारी पूरा सहयोग करेंगे और दस्तावेज देने वाले का मैपिंग होगा.
Q. मैपिंग होने वालों को भी नोटिस क्यों?
आयोग के सॉफ्टवेयर को अगर कोई विसंगति मिल रही है तो उसका नोटिस जारी हो रहा है. लेकिन योग्य मतदाता दस्तावेज सौंपेंगे तो उनके नाम की मैपिंग हो जायेगी.
ये भी पढ़ें: फिलहाल मां के पास ही रहेगी साढ़े चार साल की बेटी, झारखंड हाईकोर्ट ने दिया आदेश
ये भी पढ़ें: झारखंड सरकार और जिला उपायुक्तों को राहत, हाईकोर्ट ने असिस्टेंट टीचर नियुक्ति अवमानना मामला किया खत्म
