करोड़ों खर्च, हिसाब अब भी अधूरा! समग्र शिक्षा के ₹31.46 करोड़ अटके, जानिए पूरा मामला

झारखंड में समग्र शिक्षा की ₹70.95 करोड़ की राशि में ₹31.46 करोड़ का हिसाब अभी भी बाकी. पलामू, रांची, देवघर में करोड़ों फंसे. जानें कहां कितने अटके.

संजीत मंडल, देवघर. झारखंड में बच्चों की शिक्षा से जुड़ी समग्र शिक्षा योजना की राशि का हिसाब वर्षों बाद भी पूरी तरह साफ नहीं हो पाया है. स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग की अगस्त 2026 की जिला शिक्षा प्रदर्शन समीक्षा रिपोर्ट के अनुसार, 31 मार्च 2024 तक राज्य के 24 जिलों में ₹7,095.14 लाख यानी करीब ₹70.95 करोड़ का एडवांस बकाया था. इसमें से ₹3,948.66 लाख यानी करीब ₹39.49 करोड़ का समायोजन हो चुका है, जबकि ₹3,146.48 लाख यानी करीब ₹31.46 करोड़ अब भी असमायोजित है.

पुराने वर्षों का लंबित राशि का बड़ा हिस्सा

रिपोर्ट के अनुसार, लंबित एडवांस का बड़ा हिस्सा पुराने वित्तीय वर्षों से जुड़ा है. उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक ₹3,010.88 लाख यानी करीब ₹30.10 करोड़ का एडवांस वित्तीय वर्ष 2022-23 और उससे पहले का है. यानी अगस्त 2026 में भी इस राशि का बड़ा हिस्सा कम से कम तीन वित्तीय वर्षों से पुराने हिसाब से जुड़ा हुआ है. इससे जिलों में पुराने एडवांस के मिलान और समय पर समायोजन की स्थिति पर सवाल उठ रहे हैं.

पलामू में सबसे ज्यादा, देवघर तीसरे नंबर पर

असमायोजित एडवांस के मामले में पलामू ₹314.90 लाख के साथ राज्य में पहले स्थान पर है. रांची ₹298.27 लाख के साथ दूसरे और देवघर ₹286.85 लाख के साथ तीसरे स्थान पर है. साहिबगंज में ₹286.64 लाख, गिरिडीह में ₹270.88 लाख, बोकारो में ₹224.26 लाख और गुमला में ₹206.41 लाख का एडवांस अब भी समायोजित नहीं हुआ है.

देवघर में 31 मार्च 2024 तक कुल ₹813.59 लाख यानी करीब ₹8.14 करोड़ का एडवांस था. इसमें ₹526.74 लाख का समायोजन हो चुका है, जबकि ₹286.85 लाख यानी करीब ₹2.87 करोड़ अब भी लंबित है.

कहीं हिसाब लगभग साफ, तो कहीं करोड़ों अटके

राज्य के विभिन्न जिलों में एडवांस समायोजन की स्थिति एक जैसी नहीं है. लातेहार में केवल ₹2.72 लाख और पूर्वी सिंहभूम में ₹13.18 लाख असमायोजित एडवांस है. वहीं हजारीबाग में पूरी ₹148.46 लाख की बकाया एडवांस राशि ही असमायोजित दर्ज है. कोडरमा में ₹149.58 लाख, गढ़वा में ₹182.31 लाख और गुमला में ₹206.41 लाख लंबित है.

सात जिलों में अटका करीब 18.88 करोड़

समग्र शिक्षा के तहत असमायोजित कुल ₹31.46 करोड़ में से करीब ₹18.88 करोड़ अकेले सात जिलों में अटका हुआ है. पलामू में ₹314.90 लाख, रांची में ₹298.27 लाख, देवघर में ₹286.85 लाख, साहिबगंज में ₹286.64 लाख, गिरिडीह में ₹270.88 लाख, बोकारो में ₹224.26 लाख और गुमला में ₹206.41 लाख का एडवांस अब भी असमायोजित है.

इन सात जिलों में लंबित राशि कुल ₹1,888.21 लाख यानी करीब ₹18.88 करोड़ है. यह राज्य की कुल लंबित राशि का करीब 60 प्रतिशत है. इस सूची में पलामू पहले, रांची दूसरे और देवघर तीसरे स्थान पर है.

जिलावार एडवांस की स्थिति

जिलाकुल एडवांस (₹ लाख)लंबित/असमायोजित (₹ लाख)
लातेहार10.982.72
पूर्वी सिंहभूम61.7113.18
रामगढ़40.1613.50
लोहरदगा121.1131.01
सरायकेला-खरसावां124.4341.14
पाकुड़68.7944.54
गोड्डा61.2545.60
दुमका134.6258.16
जामताड़ा67.9366.61
सिमडेगा152.4173.87
धनबाद129.1993.40
खूंटी137.5493.50
चतरा161.1994.79
पश्चिमी सिंहभूम875.76105.89
हजारीबाग148.46148.46
कोडरमा174.19149.58
गढ़वा275.96182.31
गुमला235.80206.41
बोकारो261.22224.26
गिरिडीह1,173.30270.88
साहिबगंज687.76286.64
देवघर813.59286.85
रांची462.03298.27
पलामू715.76314.90
कुल7,095.143,146.48

सचिव का निर्देश : पुराने एडवांस का तत्काल करें मिलान

रिपोर्ट के अनुसार शिक्षा सचिव उमा शंकर सिंह ने सभी उपायुक्तों को पुराने लंबित एडवांस की तत्काल समीक्षा और मिलान कर उसका समायोजन करने का निर्देश दिया है. उन्होंने इंडिकेटरवार वित्तीय अनुशासन और पारदर्शिता पर विशेष ध्यान देने को कहा है.

निर्देश में पुराने एडवांस को लंबित रखने के बजाय संबंधित अभिलेखों, खर्च और उपलब्ध साक्ष्यों का मिलान कर मामलों को शीघ्र बंद करने तथा वित्तीय प्रबंधन की नियमित निगरानी सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है.


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By Prabhat khabar news desk

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