पेसा नियमावली को सार्वजनिक नहीं किये जाने से लोगों हैं भ्रमित : सुशील बास्की

फतेहपुर. मांझी परगना सरदार महासभा फतेहपुर प्रखंड समिति की जामजोरी पंचायत सचिवालय में बैठक हुई.

– मांझी परगना सरदार महासभा फतेहपुर प्रखंड समिति की हुई बैठक प्रतिनिधि, फतेहपुर. मांझी परगना सरदार महासभा फतेहपुर प्रखंड समिति की जामजोरी पंचायत सचिवालय में बैठक हुई. इस अवसर पर पेसा कानून की जानकारी, संताल सिविल रूल्स 1946, संताल परगना जस्टिस रेग्युलेशन 1893 में हो रहे संशोधन एवं ग्राम सभा के पारंपरिक रूढ़ि पदधारियों मांझी , नाईकी, पारानीक, गोडित, कुडाम नाईकी, भद्दो, लासेरसाल, जोगप्रणिक, जोगमांझी एवं सुसारिया को सम्मान राशि को लेकर चर्चा हुई. बैठक की अध्यक्षता राधामठ के मांझी बाबा कालीश्वर सोरेन ने की. मौके पर मुख्य रूप से राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित शिक्षक सह मांझी परगना सरदार महासभा के संरक्षक सुनील कुमार बास्की, जामताड़ा जिलाध्यक्ष सुनील कुमार हांसदा उपस्थित थे. बैठक में जामजोरी, बुनुडीह एवं बामनडीहा पंचायत के सामाजिक पद धारी मांझी, पारानीक उपस्थित थे. पेसा कानून पर चर्चा करते हुए महासभा के संरक्षक सुनील कुमार बास्की ने कहा कि पेसा कानून 1996 विगत 23 दिसंबर को झारखंड सरकार मंत्रिमंडल में पारित कर चुका है, जो स्वागत योग्य है. लेकिन पेसा नियमावली को अभी तक सार्वजनिक नहीं किया है. इसलिए आमलोगों में भ्रम की स्थिति बनी हुई है. सरकार को जल्द स्पष्ट करना चाहिए. यह भी कहा कि झारखंड सरकार हुबहू पेसा को लागू करे. ग्राम सभा को पेसा कानून 1996 में जो अधिकार निहित है उससे कम स्वीकार नहीं होगा. जामताड़ा जिलाध्यक्ष सुनील कुमार हांसदा ने कहा कि हमारी लड़ाई पेसा कानून 1996 नियमावली को लागू करने को लेकर रहा है. यदि नियमावली में छेड़छाड़ होती है तो आगे भी संघर्ष जारी रहेगा. कहा कि रूढ़ि और परंपरा के अनुसार मांझी ही ग्राम सभा का अध्यक्ष होगा. ग्राम सभा को वित्तीय शक्ति के साथ साथ प्रशासनिक शक्ति भी निहित है. इसे हमें समझने की जरूरत है. कहा कि संताल सिविल रूल्स 1946 एवं संताल परगना जस्टिस रेग्यूलेशन 1893 की समीक्षा और संशोधन से मांझी को फतेहपुर प्रखंड से शून्य दिखाया गया है. उस पर भी आगे आंदोलन जारी रहेगा. मांझी, पारानीक, जोगमांझी, गोडित, कुडाम नाईकी आदि पदधारियों को सम्मान राशि निर्गत होने तक आंदोलन किया जायेगा. मौके पर मांझी वकील मरांडी, बिशु टुडू, कामदेव टुडू, नाइकी बाबूश्वर हेम्ब्रम, मुरील मरांडी, भद्दो देविश्वर पांवरिया, जोगमांझी सुनिलाल टुडू, निर्मल मुर्मू, मुंगेर टुडू, पारानीक मिस्त्री पांवरिया, पशुपति हांसदा, दुर्योधन हेम्ब्रम, गोडित अर्जुन मरांडी आदि मौजूद थे.

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Published by: Umesh kumar

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