हिंदी के सम्मान और प्रयोग पर जोर, साहित्यकार परिषद के हिंदी दिवस समारोह में बोले कवि-साहित्यकार

हिंदी दिवस के अवसर पर साहित्यकार परिषद जामताड़ा ने भाषा के महत्व पर एक सभा का आयोजन किया. कवियों और साहित्यकारों ने हिंदी के विकास और वर्तमान चुनौतियों पर अपने विचार साझा किए.

जामताड़ा : साहित्यकार परिषद जामताड़ा के तत्वावधान में रविवार को सेंट एंथोनी स्कूल के सभागार में हिंदी दिवस मनाया गया. कार्यक्रम की अध्यक्षता कवि एवं साहित्यकार उमेश चंद्र सिन्हा ने की. इस दौरान जिले के कवि, साहित्यकार, शिक्षक एवं समाजसेवियों ने हिंदी के महत्व और वर्तमान स्थिति पर विचार रखे.

हिंदी के विकास की जरूरत

समाजसेवी व शिक्षाविद् डॉ दुर्गा दास भंडारी ने कहा कि हिंदी हमारी राष्ट्रीय भाषा है, लेकिन स्वतंत्रता के 78 वर्ष बाद भी इसे राजकीय एवं संपर्क भाषा के रूप में अपेक्षित रूप से विकसित नहीं किया जा सका है.

अंग्रेजी के प्रभाव पर चिंता

साहित्यकार एवं कवि सैयद मो. इमाम ने कहा कि हिंदी को संपर्क और राजकीय भाषा के रूप में विकसित करने के लिए निरंतर प्रयास जरूरी है. आज भी अंग्रेजी का प्रभाव अधिक है. युवाओं को हिंदी बोलने और इसके प्रयोग पर गर्व महसूस करना चाहिए.

नई पीढ़ी को साहित्य से जोड़ने पर जोर

कवि एवं शिक्षक राकेश कांत रोशन ने कहा कि हिंदी साहित्य और कवियों की रचनाओं को अधिक से अधिक पढ़ने की जरूरत है, ताकि नई पीढ़ी हिंदी साहित्य से जुड़ सके. उन्होंने कहा कि सभी भाषाओं का सम्मान करते हुए दैनिक कामकाज और बोलचाल में हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देना चाहिए.

ये रहे मौजूद

मौके पर शिक्षक अजय कुमार सिंह, राजीव रंजन, सेवानिवृत शिक्षक सह समाजसेवी कंचन गोपाल समेत अन्य मौजूद थे.

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By Umesh Kumar

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