जामताड़ा . प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत खरीफ 2026 में किसानों को बीमा कवरेज से जोड़ने का जिला प्रशासन का लक्ष्य अब भी काफी दूर है . जिले में 1,50,275 किसानों का फसल बीमा कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, लेकिन 20 अगस्त तक छहों प्रखंडों को मिलाकर महज 21,799 किसान ही योजना से जुड़े हैं . यह कुल लक्ष्य का सिर्फ 14.5 प्रतिशत है . ऐसे में निर्धारित लक्ष्य हासिल करने के लिए अभी 1,28,476 किसानों को योजना से जोड़ना बाकी है .
जामताड़ा प्रखंड सबसे आगे, नाला में सबसे कम बीमा
प्रशासनिक डैशबोर्ड के अनुसार, बीमित किसानों की संख्या के मामले में जामताड़ा प्रखंड सबसे आगे है . यहां अब तक 4,051 किसानों का फसल बीमा हुआ है . इसके बाद नारायणपुर में 3,871, फतेहपुर में 3,566, कुंडहित में 3,537 और करमाटांड़-विद्यासागर में 3,458 किसानों ने योजना का लाभ लिया है .
वहीं, नाला प्रखंड में सबसे कम 3,316 किसानों का बीमा हुआ है . सभी छह प्रखंडों को मिलाकर बीमित किसानों की संख्या 21,799 तक पहुंची है .
प्रखंडवार बीमित किसानों की स्थिति
| प्रखंड | बीमित किसान |
| जामताड़ा | 4,051 |
| नारायणपुर | 3,871 |
| फतेहपुर | 3,566 |
| कुंडहित | 3,537 |
| करमाटांड़-विद्यासागर | 3,458 |
| नाला | 3,316 |
| कुल | 21,799 |
26,264 आवेदन, 15,597 हेक्टेयर फसल का बीमा
प्रशासनिक डैशबोर्ड के अनुसार, अब तक किसानों की ओर से कुल 26,264 आवेदन किए गए हैं . इनमें ऋणी और गैर-ऋणी दोनों श्रेणी के किसानों के आवेदन शामिल हैं . वहीं, करीब 15,597 हेक्टेयर कृषि क्षेत्र का भी बीमा दर्ज किया गया है .
आवेदन की संख्या बीमित किसानों की संख्या से अधिक होने से यह संकेत मिलता है कि कई आवेदन अभी प्रक्रिया में हो सकते हैं . विभाग के सामने इन आवेदनों को समय पर पूरा करने और अधिक से अधिक पात्र किसानों को योजना से जोड़ने की चुनौती है .
प्राकृतिक आपदाओं से फसल नुकसान पर मिलता है आर्थिक सहारा
खरीफ मौसम में धान समेत अन्य फसलों को अतिवृष्टि, अनावृष्टि, कीट और रोग जैसी प्राकृतिक आपदाओं से नुकसान का खतरा रहता है . ऐसे समय में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना किसानों के लिए आर्थिक सुरक्षा का महत्वपूर्ण माध्यम है . फसल खराब होने की स्थिति में बीमा कवरेज किसानों को आर्थिक नुकसान से उबरने में मदद कर सकता है .
इसके बावजूद जिले में बड़ी संख्या में किसान अभी तक योजना से नहीं जुड़ पाए हैं . लक्ष्य के मुकाबले महज 14.5 प्रतिशत किसानों का बीमा होने से विभाग के सामने कम समय में कवरेज बढ़ाने की चुनौती बनी हुई है .
पंचायत स्तर पर जागरूकता अभियान की जरूरत
बड़ी संख्या में किसानों के योजना से बाहर रहने को देखते हुए पंचायत स्तर पर विशेष जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत महसूस की जा रही है . किसानों को फसल बीमा के लाभ, पात्रता, आवेदन प्रक्रिया और जरूरी दस्तावेजों की जानकारी उपलब्ध कराने से योजना का दायरा बढ़ाया जा सकता है .
प्रशासन के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती शेष 1,28,476 किसानों को कम समय में योजना से जोड़ने की है . यदि अभियान में तेजी नहीं आयी, तो निर्धारित लक्ष्य और वास्तविक उपलब्धि के बीच अंतर और बढ़ सकता है .
