जामताड़ा : जिला खनन विभाग को सरकार द्वारा दिये गये सालाना लक्ष्य के विरूद्ध विभाग अब तक 50 प्रतिशत राजस्व भी वसूली नहीं कर पायी है. खनन विभाग को सालाना छह करोड़ 83 लाख रुपया राजस्व वसूली का लक्ष्य दिया गया था. जिले में कुल 70 खनन पट्टा विभिन्न लोगों को उत्खनन के लिये दिया गया है.
जिसमें तीन खनन पट्टा सफेद खनन का है जिनमें जयंतो भट्टाचार्य, उमेश सिंह, सुभाष लच्छीरामका का नाम शामिल है. विभाग द्वारा राजस्व वसूली नहीं कर पाने के पीछे क ई तर्क दिया जा रहा है. मगर इसके पीछे का मूल कारण अवैध उत्खनन को माना जा रहा है. अवैध उत्खनन का नतीजा यह है कि प्रतिदिन दर्जनों सफेद एवं काला पत्थर का वाहन सड़कों पर दौड़ते देखा जाता है.
लेकिन विभाग और न ही पुलिस इस दिशा में कार्रवाई कर रही है. कुछ दिनों पूर्व अनुमंडल पदाधिकारी अखिलेश प्रसाद सिन्हा ने अवैध उत्खनन कर ले जा रहे वाहन को जब्त कर खनन विभाग के हवाले करने पर यह मामला साफ है. जहां एक ओर विभाग अवैध विस्फोटक की बात नहीं स्वीकारती है वहीं जिले के मिहिजाम के कैलाही पहाड़, बोदमा पहाड़, करमाटांड़ प्रखंड, नारायणपुर प्रखंड एवं बिंदापाथर थाना क्षेत्र के कई पहाड़ों पर अवैध रूप से ब्लास्टिंग कर उत्खनन किया जा रहा है. जिला खनन पदाधिकारी कैलाश रजक ने बताया कि जिले में 70 लोगों को खनन पट्टा दिया गया है.
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद से लीज धारकों द्वारा एमओइएफ प्रमाण पत्र उपलब्ध नहीं करा पा रहे हैं. जिस कारण जिले में 82 खनन पट्टा धारक में मात्र 70 ही खनन पट्टा धारक बचे हैं. एमओइएफ प्रमाण पत्र उपलब्ध नहीं करा पाने के कारण खनन पट्टा का नवीनीकरण, नया खनन पट्टा, खनन पट्टा ट्रांसफर आदि नहीं हो पा रहा है. इसके अलावे आरइओ जामताड़ा द्वारा पथ निर्माण में दुमका जिला के सुड़ीचुवा से पत्थर लिया जा रहा है. जिस कारण से जामताड़ा खनन विभाग को राजस्व की हानि हो रही है.
