फोटो: 02 जाम 17 जर्जर छात्रावास एवं रसोईघर प्रतिनिधि, नाला राजकीय उच्च विद्यालय प्लस टू का आदिवासी छात्रावास आज भी जिर्णोद्धार की बाट जोह रहा है. ज्ञात हो कि सरकारी तंत्र की उदासीनता के कारण छात्रावास अपने अस्तित्व पर आंसू बहा रहा है. यहां के छात्र सुख-सुविधाओं के अभाव में हॉस्टल छोड़ कर भागने को मजबूर हो रहे हैं. ज्ञात हो कि कल्याण विभाग द्वारा छात्रावास का निर्माण 1984 में कराया गया था. जिसकी क्षमता 25 छात्रों की थी परंतु आज यहां मात्र दो चार छात्र ही मौजूद है. जबकि रजिस्टर पर कुल 17 छात्र नामांकित है. यहां रह रहे धर्मेंजय टुडू, नरेश हांसदा, स्टेफन मरांडी, मार्शेल टुडू ने बताया कि सरकार की ओर से किसी भी प्रकार की सुविधा नहीं दी जाती है. छात्रावास की कहीं किवाड़ नहीं है तो कहीं खिड़की नहीं. विद्यालय के प्रभारी सह हॉस्टल इंचार्ज सुबोध कुमार घोष तथा प्रधान लिपिक वरूण मंडल ने बताया कि इस छात्रावास का निरीक्षण एक वर्ष पूर्व तत्कालीन जिला कल्याण पदाधिकारी अगापिट टेटे ने निरीक्षण के उपरांत 50 बेड वाले नये छात्रावास बनाने का प्रोपोजल तैयार कर समर्पित करने का आश्वासन दिया था. मगर आज तक उसका लाभ नहीं मिल पाया. छात्रावास की मौजूदा स्थिति व व्यवस्था पर आदिवासी समुदाय भी आक्रोशित हैं.
राजकीय उच्च विद्यालय प्लस टू का आदिवासी छात्रावास बदहाल
फोटो: 02 जाम 17 जर्जर छात्रावास एवं रसोईघर प्रतिनिधि, नाला राजकीय उच्च विद्यालय प्लस टू का आदिवासी छात्रावास आज भी जिर्णोद्धार की बाट जोह रहा है. ज्ञात हो कि सरकारी तंत्र की उदासीनता के कारण छात्रावास अपने अस्तित्व पर आंसू बहा रहा है. यहां के छात्र सुख-सुविधाओं के अभाव में हॉस्टल छोड़ कर भागने को […]
