माघी पूजा पर उत्साहित हैं आदिवासी

प्रतिनिधि, कुंडहितसिदो कान्हू मुर्मू पहाड़गोड़ा मैदान में सोमवार को माघी पूजा के मौके पर आदिवासी समुदाय के लोगों ने परंपरागत तरीके से पूजा की. जिसमें मुर्गी की बली देकर वर्ष के अंतिम त्योहार को धूमधाम के साथ मनाया. अंतिम त्योहार होने पर क्षेत्र के विभिन्न गांवों से वीर गोड़ेत, प्रधान, जोगमांझी, नायकी, कुड़ाम नायकी, पारामनिक […]

प्रतिनिधि, कुंडहितसिदो कान्हू मुर्मू पहाड़गोड़ा मैदान में सोमवार को माघी पूजा के मौके पर आदिवासी समुदाय के लोगों ने परंपरागत तरीके से पूजा की. जिसमें मुर्गी की बली देकर वर्ष के अंतिम त्योहार को धूमधाम के साथ मनाया. अंतिम त्योहार होने पर क्षेत्र के विभिन्न गांवों से वीर गोड़ेत, प्रधान, जोगमांझी, नायकी, कुड़ाम नायकी, पारामनिक ने पूजा में शामिल हुआ. पुजारी राजेंद्र मुर्मू ने कहा कि आदिवासी समुदाय मुख्यत: छह त्योहार वर्ष में मनाते हैं. जिसमें से माघी पूजा वर्ष की अंतिम पर्व होता है. श्री मुर्मू ने कहा कि पहला पर्व बाहा जो गैर-आदिवासी होली के रूप में मनाते हैं. दूसरा एरोअ, तीसरा हरियाड़, चौथा जानथाड़, पांचवां सोहराय है. ठीक सोहराय पर्व के बाद ही माघी पूजा होती है, जो आदिवासी समुदाय का अंतिम एवं छठा पर्व है. पूजा क ो लेकर सिदो कान्हू मुर्मू मैदान में आदिवासी समुदाय के काफी संख्या में लोग जुटे थे. मौके पर गोड़ेत रामेश्वर मुर्मू, जोगमांझी नरेन हांसदा, नायकी बाबुश्वर मुर्मू, कुड़ाम नायकी पलटन टुडू, पारामनिक जिया प्रसाद मुर्मू, राजाधन हेंब्रम, मदुसूदन हेंब्रम, हेमलाल सोरेन तथा प्रधान कुनू मुर्मू, जयचांद मुर्मू, कारबारी हांसदा, राखाल मरांडी, सीताराम मुुर्मू, सर्वेश्वर सोरेन सहित अन्य उपस्थित थे.———————————–फोटो: 09 जाम 05माघी पूजा करते ग्रामीण.

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