प्रतिनिधि, बिंदापाथर झारखंड राज्य गठन को 14 वर्ष बीत चुका है. लेकिन नाला विधानसभा के किसान उपेक्षा का दंश झेलने को मजबूर है. इस क्रम में राज्य में कई सरकारें बनी. लेकिन इलाके के महत्वपूर्ण सिंचाई परियोजना अजय नहर की स्थिति जस की तस बनी हुई है. कई बार जांच कर नहर में पानी छोड़ा गया. लेकिन रिसाव होने के कारण पानी बंद कर दिया गया. जिससे इसका लाभ किसानों को नहीं मिल पाया. किसान राजेश हांसदा, जिशु मुर्मू, किसान मुर्मू, संजय महतो बताते हैं कि प्राय: सभी पार्टी के चुनावी एजेंडे में अजय नहर को पूरा कर हर खेत में पानी देने का खोखला दावा किया गया. मालूम हो कि देवघर के सिकटिया से बंगाल सीमा तक करीब 120 किमी नहर, नाला विस सीमा क्षेत्र के सैकड़ों किसानों के हजारों एकड़ उपजाऊ जमीन नहर की गोद मंे समा गयी. सिंचाई के नाम पर विभिन्न सरकारी योजना के तहत तालाब खोदी गयी. लेकिन सितंबर-अक्तूबर माह में ही अधिकांश तालाब सूख जाते हैं. सिंचाई की सुविधा के अभाव में फसल भगवान भरोसे ही रहता है………………………………..फोटो: 28 जाम 07 नहर
ओके... अजय नहर योजना की नहीं बदली सूरत
प्रतिनिधि, बिंदापाथर झारखंड राज्य गठन को 14 वर्ष बीत चुका है. लेकिन नाला विधानसभा के किसान उपेक्षा का दंश झेलने को मजबूर है. इस क्रम में राज्य में कई सरकारें बनी. लेकिन इलाके के महत्वपूर्ण सिंचाई परियोजना अजय नहर की स्थिति जस की तस बनी हुई है. कई बार जांच कर नहर में पानी छोड़ा […]
