बदहाली पर आंसू बहा रहे हैं पुस्तकालय

जामताड़ा : जिला मुख्यालय में पुस्तक प्रेमी और युवाओं के ज्ञान बढ़ाने के लिए तीन-तीन पुस्तकालय बनाया गया है, लेकिन पुस्तक के अभाव में सभी बेकार पड़े है. विधायक निधि से लाखों रुपये खर्च कर बनाये गये तीनों पुस्तकालय अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहे हैं. शहर के गांधी मैदान के निकट 1987 में हजारों […]

जामताड़ा : जिला मुख्यालय में पुस्तक प्रेमी और युवाओं के ज्ञान बढ़ाने के लिए तीन-तीन पुस्तकालय बनाया गया है, लेकिन पुस्तक के अभाव में सभी बेकार पड़े है. विधायक निधि से लाखों रुपये खर्च कर बनाये गये तीनों पुस्तकालय अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहे हैं.

शहर के गांधी मैदान के निकट 1987 में हजारों रुपये खर्च कर दो कमरे का पुस्तकालय भवन का निर्माण किया गया था. इसके लिए नगर विकास विभाग बिहार सरकार, पटना से जामताड़ा अधिसूचित क्षेत्र कमेटी को राशि भेजी गयी थी. भवन बन गया. चार जुलाई 1987 में पुस्तकालय को उदघाटन दुमका के तत्कालीन उपायुक्त ने किया था, लेकिन पुस्तकालय को आज तक पुस्तक नसीब नहीं हुआ.

इसका उपयोग अन्य सरकारी कार्य के लिये होने लगा. फिलहाल वर्षो से इस भवन में ताला लटक रहा है. वहीं दूसरा पुस्तकालय वर्ष 1999 में जामताड़ा के तत्कालीन विधायक फुरकान अंसारी ने विधायक निधि से तीन कमरे को पुस्तकालय बनवाया. इसके बनाने में दो लाख 10 हजार रुपये खर्च आया, लेकिन यह पुस्तकालय भवन भी अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है. भवन के मुख्य गेट पर ताला लगा रहता है.

इसमें पुस्तक, बैठने के लिये चेयर और पेयजल सहित किसी तरह की सुविधाएं नहीं हैं. तीसरा पुस्तकालय वर्ष 2011 में जिला विकास के निधि से बनाया गया. इसके निर्माण में साढ़े 12 लाख रुपये खर्च आये. इस पुस्तकालय भवन में बैठने के लिये चेयर, टेबुल, पेयजल, बिजली की सुविधा है. लेकिन पुस्तक होने से गेट पर ताला लटक रहा है.
– सुरेश प्रसाद सिंह –

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