ग्रामीण झारखंड-पश्चिम बंगाल में उलझे
कुंडहित: कुंडहित प्रखंड के बंगाल सीमा पर स्थित मुड़ाबेड़िया गांव राज्य गठन के 17 वर्ष बाद भी विकास से वंचित हैं. गांव की आबादी लगभग दो हजार है. गांव तक पहुंचने के लिए अदद सड़क नहीं है. साथ ही कोई साधन भी नहीं हैं. इसके अलावा बिजली, स्वास्थ्य, शिक्षा की भी सुविधा नहीं हैं. इसको लेकर ग्रामीण अपने को कोश रहे हैं. लोग पश्चिम बंगाल में शामिल करने की मांग कर रहे हैं.
गौरतलब है कि यह गांव प्रखंड मुख्यालय से लगभग तीस किमी दूर है.
गांव की भौगोलिक स्थिति यह है कि घर झारखंड में हैं, तो खेत-खलिहान बंगाल में है. ग्रामीणों का व्यवसाय से लेकर शादी ब्याह तक बंगाल से प्रचलन है. गांव में बुनियादी सुविधा नाम की कोई चीज नहीं है. सरकारी कर्मचारी भी कभी-कभी पहुंचते हैं. विकास का काम भी मनमर्जी तरीके से होता है. ग्रामीणों ने बताया कि गांव में सरकारी पदाधिकारी के पहुंचने का डर रहता नहीं है. इसलिए विकास का कार्य भी सही ढंग से नहीं हो रहा है. बिजली नहीं रहती है. कभी भी सरकारी चिकित्सक का दर्शन होता नहीं है. स्कूल है, लेकिन बच्चों के अनुपात में शिक्षक नहीं हैं. एक ही शिक्षक गांव के मध्य विद्यालय में लगभग 400 बच्चों को पढ़ाते हैं.
क्या कहती हैं जिप सदस्य
जिप सदस्य सुभद्रा बाउरी ने कहा कि पूर्वांचल क्षेत्र के मुड़ाबेड़िया गांव का विकास झारखंड राज्य के निर्माण के बाद भी सही ढंग से नहीं किया गया. कभी भी सरकारी पदाधिकारी गांव तक पहुंचे नहीं. कई बार जिला परिषद की बैठक में विकास की बात को उठाया गया, लेकिन आज भी सड़कों का निर्माण नहीं हो रहा है. विद्यालयों में शिक्षक नहीं है. इस बैठक में डीसी को गांव की समस्या के बारे में बतायेंगे.
