सिंचाई से हो रहे वंचित

रानीश्वर : प्रथम पंच वर्षीय योजना के तहत रानीश्वर प्रखंड के दिगलपहाड़ी में दो पहाड़ों के बीच झरना को बांध कर दिगलपहाड़ी जलाशय का निर्माण कराया गया था. दिगलपहाड़ी जलाशय का निर्माण कराकर उससे दो नहर का भी निर्माण कराया गया था. उस नहर से चापुड़िया , आसनबनी , सिउलीबोना, तिलाबुनी आदि गांवों के किसानों […]

रानीश्वर : प्रथम पंच वर्षीय योजना के तहत रानीश्वर प्रखंड के दिगलपहाड़ी में दो पहाड़ों के बीच झरना को बांध कर दिगलपहाड़ी जलाशय का निर्माण कराया गया था. दिगलपहाड़ी जलाशय का निर्माण कराकर उससे दो नहर का भी निर्माण कराया गया था. उस नहर से चापुड़िया , आसनबनी , सिउलीबोना, तिलाबुनी आदि गांवों के किसानों को सिंचाई सुबिधा उपलब्ध कराया जा रहा था.

अविभाजित बिहार में किसानों को दिगलपाहाड़ी जलाशय से खरीफ के अलावे रबि व गरमी धान की खेती के लिए पटवन मिलता था. लेकिन वर्ष 2000 में भारी वर्षा के कारण जलाशय का तटबंध टूट जाने तथा बिहार से झारखंड अलग राज्य बनने के बाद से किसानों को दिगलपाहाड़ी जलाशय से पटवन मिलना बंद हो गया है. 2000 में जलाशय का तटबंध टूट जाने के दो साल बाद सिंचाई विभाग द्वारा तटबंध निर्माण के लिए टेंडर निकाल कर तटबंध मरम्मती का काम शुरू कराया गया था.

मरम्मती का कार्य अभी भी पूरा नहीं हो सका है तथा जलाशय से निकाले गये दो नहर का भी मरम्मती नहीं कराया गया है. करीब डेढ़ दशक से नहर में पानी आना बंद हो जाने से नहर का अस्तित्व भी समाप्त होने लगा है. बरसात में जलाशय से चापुड़िया स्कूल टोला तक ही पानी पहुंचता है. नहर की मरम्मती नहीं कराये जाने के कारण आगे तक पानी नहीं पहुंच रहा है. डेढ़ दशक पहले तक चापुड़िया, आसनबनी, सिउलीबोना के किसान जलाशय के पानी से साल भर फसल उपजाते थे. जो सिंचाई विभाग के उदासीनता के कारण बंद हो गया.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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