12 महीने का अनुबंध था, बीच में ही हटाया, वीसी से शिकायत

जमशेदपुर महिला विश्वविद्यालय में 12 महीने के अनुबंध से पहले ही 18 पीजी टॉपर छात्राओं को हटाने पर विवाद, कुलपति से की गई शिकायत।

वरीय संवाददाता, जमशेदपुर

जमशेदपुर महिला विश्वविद्यालय की 18 पूर्व पीजी टॉपर छात्राएं, जिन्हें विभिन्न विभागों में टीचिंग असिस्टेंट के पद पर नियुक्त किया गया था, उन्हें अनुबंध अवधि समाप्त होने से पहले ही अचानक सेवा से मुक्त कर दिया गया है. इसके विरोध में शनिवार को पीड़ित छात्राओं (सत्र 2023-25) ने विश्वविद्यालय की कुलपति को एक पत्र सौंपकर न्याय की गुहार लगायी है. छात्राओं ने इस असमय सेवामुक्ति को पूरी तरह से मनमाना, तर्कहीन और अनुचित करार दिया है.

सौंपे गये पत्र में छात्राओं ने उल्लेख किया है कि विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा जारी अधिसूचना के तहत उन्हें रु15,000 प्रति माह के समेकित मानदेय पर 12 महीनों के निश्चित अनुबंध के लिए नियुक्त किया गया था. वे पूरी निष्ठा और ईमानदारी से अपने शैक्षणिक और संस्थागत दायित्वों का निर्वहन कर रही थीं. इसके बावजूद, 15 जुलाई को प्रभारी रजिस्ट्रार डॉ. सलोनी कुजूर के हस्ताक्षर से जारी एक अधिसूचना के जरिये उन्हें अनुबंध के बीच में ही बिना किसी वैध कारण, नोटिस या सुनवाई का अवसर दिये अचानक हटा दिया गया.

छात्राओं का कहना है कि नियुक्ति पत्र में ऐसी कोई शर्त नहीं थी, जिसके तहत उन्हें अवधि से पहले हटाया जा सके. इस अचानक हुई कार्रवाई से उनके सामने गहरा आर्थिक और मानसिक संकट खड़ा हो गया है. प्रभावित होने वाली छात्राओं में मुख्य रूप से बांग्ला विभाग की प्रतिमा गोराई, अर्थशास्त्र की श्रद्धा सिन्हा, अंग्रेजी की साइमा परवीन, भूगोल की निधि कुमारी सहित हिंदी, इतिहास, गृह विज्ञान, राजनीति विज्ञान, भौतिकी, रसायन शास्त्र व वाणिज्य समेत 18 विभागों की पीजी टॉपर्स शामिल हैं. छात्राओं ने कुलपति से इस निष्कासन आदेश पर पुनर्विचार करते हुए इसे वापस लेने की मांग की है.


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Author: Rima rani dey

Published by: Sweta Vaidya

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