राष्ट्रपति और पीएम को सरना धर्म काॅलम कोड देने के लिए लाखों की संख्या में स्पीड पोस्ट भेजा जायेगा

करनडीह में माझी परगना महाल की बैठक में आदिवासी संताल समाज ने सरना धर्म कोड की मांग को लेकर निर्णायक लड़ाई का ऐलान किया है. राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को लाखों की संख्या में पत्र भेजने का निर्णय लिया गया है.

जमशेदपुर : करनडीह स्थित दिशोम जाहेरथान प्रांगण में बुधवार को माझी परगना महाल की बैठक जुगसलाई तोरोप परगना दशमत हांसदा की अध्यक्षता में हुई. इसमें आदिवासी संताल समाज के अस्तित्व, पहचान और अधिकारों की रक्षा के लिए चर्चा की गई. बैठक में निर्णय लिया गया कि समाज की सरना धर्म कोड की मांग को लेकर अब आर-पार की लड़ाई लड़ी जाएगी.

समाज के लोगों को एकजुट होने का किया आह्वान

बैठक को संबोधित करते हुए जुगसलाई तोरोप परगना दशमत हांसदा ने समाज के लोगों को एकजुट होने का आह्वान किया. उन्होंने कहा - आदिवासी स्वशासन व्यवस्था के प्रमुख माझी बाबा, नायके बाबा, पारानिक और गोडेत अपने-अपने गांवों में सरना धर्म की मान्यता को लेकर बैठकें आयोजित करें. सरना धर्म की संवैधानिक मान्यता के लिए राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्री और रजिस्ट्रार जनरल को पूरे क्षेत्र से लाखों की संख्या में पत्र व स्पीड पोस्ट भेजा जाये. साथ ही सभी आदिवासी सामाजिक संगठन और धार्मिक संस्थान भी अपने स्तर से केंद्र सरकार को मांग पत्र भेजने का कार्य करें.

बैठक में ये थे मौजूद

बैठक में हरिपोदो मुर्मू, पुन्ता मुर्मू, लखन मार्डी, देश पारानिक बाबा दुर्गाचरण मुर्मू, नवीन मुर्मू, बिंदे सोरेन, सुरेंद्र टुडू, गोपाल हांसदा, सुखराम किस्कू, रेंटा मुर्मू, लेदेम मुर्मू, कारु मुर्मू, शंकर हेंब्रम, विश्वनाथ मार्डी, सलखू सोरेन, जितु मुर्मू, बिपिन चंद्र मुर्मू, सुशील मुर्मू और वीर सिंह बास्के समेत काफी संख्या में समाज के लोग मौजूद थे.

विरोधी तत्वों को सबक सीखाने का समय आ गया

दशमत हांसदा दशमत हांसदा ने कहा कि अब आदिवासियों को सरकार के समक्ष अपनी असली ताकत दिखाने का समय आ गया है. समाज को अपने पूर्वजों की वीरता, कथनी और करनी को याद करने की जरूरत है. आदिवासियों ने इतिहास में कभी अन्याय और अत्याचार के आगे घुटने नहीं टेके हैं. आदिवासी समाज प्रजातांत्रिक व्यवस्था पर अटूट विश्वास रखता है, जिसका जीता-जागता उदाहरण उनकी पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था है. लेकिन कुछ विरोधी लोग आदिवासी समाज को उनके संवैधानिक अधिकारों से वंचित रखना चाहते हैं. अब ऐसे गलत मंसूबे रखने वालों को सबक सीखाने का समय आ गया है. इस बार सरना कोड का अधिकार हर हाल में लेना होगा, अन्यथा समाज विरोधी तत्वों को उखाड़ फेंकने के लिए बाध्य होगा.

आय-व्यय के ब्योरे पर लगी मुहर, नए सम्मेलनों का प्रस्ताव पारित

बैठक के दौरान विगत दिनों करनडीह जाहेरथान में आयोजित सरना धर्म सम्मेलन की समीक्षा की गई और उसका लेखा-जोखा प्रस्तुत किया गया. कुचूं दिशोम देश पारानिक बाबा नवीन मुर्मू ने सम्मेलन का आय-व्यय प्रस्तुत किया, जिसे उपस्थित सभी सदस्यों ने सर्वसम्मति से पारित किया. कोल्हान प्रमंडल स्तरीय सम्मेलन की सफलता के बाद धाड़, कुचूंग, बारहा, पातकोम और सिंञ दिशोम में ''धर्म सम्मेलन'' आयोजित करने का प्रस्ताव पारित हुआ. फरवरी अंत तक सभी दिशोम में सम्मेलन आयोजित कर आगामी जनगणना में सरना धर्म कोड दर्ज कराने के लिए जन-जागरण चलाने का संकल्प लिया गया.

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लेखक के बारे में

By दशमत सोरेन

दशमत सोरेन ने रांची विश्वविद्यालय से अंग्रेजी साहित्य में स्नातकोत्तर किया है. वे 29 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. उनकी विशेषज्ञता मुख्य रूप से झारखंड की आदिवासी-मूलवासी राजनीति, स्थानीय समुदायों की भाषा-संस्कृति और यहां के सामाजिक ताना-बाना है. वे वर्ष 2010 से प्रभात खबर के साथ एक ट्राइबल रिपोर्टर के रूप में काम कर रहे हैं.

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