सड़कों पर आवारा मवेशियों का कब्जा, 52 लाख की लागत से बनी गोशाला भी अब तक नहीं हो पाई शुरू

झारसुगुड़ा में आवारा मवेशियों के कारण बढ़ रहे सड़क हादसे. प्रशासन द्वारा कराया गया सर्वे दो साल बाद भी फाइलों में दबा, गोशालाएं अब तक नहीं हो पाईं शुरू.

शहर की मुख्य सड़कों से लेकर गली-मोहल्लों तक आवारा गाय-सांड का जमावड़ा लगा रहता है. इससे वर्षों से यातायात की समस्या बनी हुई है. अब यह समस्या गंभीर रूप ले चुकी है, लेकिन जिला प्रशासन और नगर प्रशासन की ओर से अब तक कोई प्रभावी समाधान नहीं हो पाया है.

सर्वेक्षण के बाद भी नहीं हुई ठोस कार्रवाई

पूर्व जिलापाल अबोली सुनील नरवणे के निर्देश पर 25 जुलाई 2024 को झारसुगुड़ा नगर प्रशासन और जिला पशु चिकित्सालय के संयुक्त तत्वावधान में आवारा मवेशियों का सर्वेक्षण कराया गया था. हालांकि, दो वर्ष बीत जाने के बाद भी सर्वेक्षण रिपोर्ट फाइलों में ही दबी हुई है. नगर प्रशासन और जिला पशु चिकित्सालय के बीच समन्वय के अभाव के कारण इस दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है.

मुख्यमंत्री पशु कल्याण योजना के तहत लगभग 52 लाख रुपये की लागत से करीब 60 आवारा मवेशियों के लिए एक गोशाला का निर्माण भी पूरा हो चुका है, लेकिन प्रशासनिक उदासीनता के कारण वह अब तक संचालित नहीं हो पाई है. वहीं मुख्यमंत्री शहरी विकास योजना के तहत लगभग 5 करोड़ रुपये की लागत से अत्याधुनिक गोशाला बनाने की तैयारी चल रही है, लेकिन उसके पूरी तरह कार्यशील होने में अभी समय लगेगा.

सड़क दुर्घटनाओं पर रोक लगाने की मांग

शहर के कुछ पशुपालक मवेशियों को गोशालाओं में रखने के बजाय खुले में छोड़ देते हैं. शाम होते ही ये मवेशी सड़कों पर आ जाते हैं, जिससे सड़क दुर्घटनाओं में लोगों के घायल होने के साथ-साथ प्रतिदिन कई गाय-बैलों की भी मौत हो रही है.

इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए पहले एमसीएल ऑडिटोरियम, बेहरामाल में एक कार्यशाला आयोजित की गई थी. इसमें आशा कार्यकर्ताओं, आंगनवाड़ी कर्मियों, वार्ड अधिकारियों, पशुधन निरीक्षकों और अन्य कर्मचारियों की टीम बनाकर वार्डवार सर्वेक्षण कराने तथा समाधान की दिशा में कार्य करने का निर्णय लिया गया था.

शहरवासियों ने मांग की है कि प्रस्तावित नई गोशाला के पूरी तरह चालू होने का इंतजार करने के बजाय नगर प्रशासन और जिला पशु चिकित्सालय तत्काल सभी आवारा मवेशियों को पकड़कर सुरक्षित स्थानों पर रखे, ताकि सड़क दुर्घटनाओं पर रोक लग सके और लोगों को राहत मिल सके.


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By Aditya Tiwari

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