अनंत किस्कू ने सोशल मीडिया platform को बनाया संताली भाषा का learning मंच

अनन्त किस्कू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'OLITUN' को संताली भाषा और संस्कृति के संरक्षण का एक अनूठा मंच बनाया है। चित्रों और डिजिटल माध्यमों से युवाओं को भाषा से जोड़ने का यह प्रयास सराहनीय है।

जमशेदपुर : आज के डिजिटल दौर में सोशल मीडिया युवाओं के जीवन का अहम हिस्सा बन चुका है. जहां सोशल मीडिया का इस्तेमाल बड़ी संख्या में लोग मनोरंजन और समय बिताने के लिए करते हैं, वहीं अनंत किस्कू ने इसी डिजिटल माध्यम को संताली भाषा और संस्कृति के संरक्षण का जरिया बनाया. उन्होंने वर्ष 2021 में ‘OLITUN’ की शुरुआत की. इसका उद्देश्य संताली भाषा, इतिहास और संस्कृति से जुड़ी जानकारी को डिजिटल माध्यम से लोगों तक पहुंचाना था. धीरे-धीरे यह मंच संताली भाषा सीखने और उससे जुड़ने वाले युवाओं के लिए एक उपयोगी माध्यम बन गया.

चित्रों के जरिए संताली शब्द सीखने की पहल

OLITUN की खासियत यह है कि इसमें केवल संताली शब्दों की जानकारी ही नहीं दी जाती, बल्कि चित्रों के माध्यम से उन्हें समझाने का प्रयास किया जाता है. फल, सब्जियां, रिश्ते, देश, दैनिक जीवन में इस्तेमाल होने वाली वस्तुओं और अन्य सामान्य शब्दों को संताली भाषा में प्रस्तुत किया जाता है. इससे बच्चों और युवाओं के लिए नए शब्दों को समझना और याद रखना आसान होता है. अनंत किस्कू का प्रयास भाषा को किताबों और पारंपरिक माध्यमों तक सीमित रखने के बजाय उसे मोबाइल स्क्रीन तक पहुंचाने का रहा है.

शहरों में कम हो रहे पारंपरिक शब्दों को बचाने का प्रयास

शहरी क्षेत्रों में रहने वाले कई संताली युवाओं की रोजमर्रा की बातचीत में हिंदी, बंगाली और अंग्रेजी के शब्दों का प्रभाव बढ़ रहा है. इसके कारण संताली के कई पारंपरिक शब्दों का इस्तेमाल धीरे-धीरे कम होता जा रहा है. अनंत किस्कू ने इसी चुनौती को समझते हुए डिजिटल माध्यम से संताली शब्दों को युवाओं तक पहुंचाने का काम शुरू किया. उनका प्रयास केवल भाषा सिखाने तक सीमित नहीं है, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी भाषाई पहचान से जोड़ने की दिशा में भी है.

युवाओं के बीच बढ़ी OLITUN की पहुंच

OLITUN को सोशल मीडिया पर युवाओं की अच्छी प्रतिक्रिया मिली. वर्ष 2024 में OLITUN के Facebook पेज पर करीब 55 हजार फॉलोअर्स थे और इनमें बड़ी संख्या 18 से 30 वर्ष के युवाओं की थे. इसके बाद मंच की पहुंच और बढ़ी तथा अब इसके फॉलोअर्स 1.45 लाख से अधिक हैं. संताली शब्दों पर बनाए गए Instagram वीडियो को भी हजारों लोगों ने पसंद किया. इससे पता चलता है कि डिजिटल माध्यम से संताली भाषा से जुड़ी सामग्री के लिए युवाओं के बीच रुचि मौजूद है.

ओल चिकी सीखने की दिशा में बढ़ा डिजिटल अभियान

वर्ष 2026 में ‘Ol Itun – Ol Chiki Learning’ ऐप के उपलब्ध होने से OLITUN से जुड़ा डिजिटल भाषा अभियान और आगे बढ़ा. ओल चिकी लिपि के माध्यम से संताली भाषा सीखने की सुविधा डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराना भाषा संरक्षण के प्रयासों को नई दिशा देता है. अनंत किस्कू की पहल यह दिखाती है कि भाषा और संस्कृति के संरक्षण के लिए केवल अतीत की परंपराओं को याद करना पर्याप्त नहीं है. नई पीढ़ी तक पहुंचने के लिए आधुनिक तकनीक और डिजिटल माध्यमों का उपयोग भी जरूरी है. सोशल मीडिया को संताली भाषा की पाठशाला बनाने का यह प्रयास आने वाली पीढ़ियों को अपनी भाषा और सांस्कृतिक पहचान से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है.

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लेखक के बारे में

By साहिल अस्थाना

साहिल अस्थाना पिछले चार वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. पत्रकारिता के दौरान उन्होंने विभिन्न विषयों पर खबरों को कवर करते हुए जमीनी स्तर की रिपोर्टिंग और समाचार लेखन का अनुभव हासिल किया है. वर्तमान में वह प्रभात खबर डिजिटल से बतौर कंटेंट राइटर जुड़े हुए हैं. अपने वर्तमान कार्यक्षेत्र में वह मुख्य रूप से जमशेदपुर और इसके आसपास के क्षेत्रों से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरों को कवर करते हैं. समाचारों को सरल, तथ्यपरक और पाठकों के लिए प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करना उनकी लेखन शैली की खासियत है.

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