अस्पताल में 7 घंटे बैठी रही सबर महिला, नहीं मिल सकी एंबुलेंस, फिर...

सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं के दावों की पोल खुल गई जब पोटका प्रखंड की एक सबर महिला को अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद घर जाने के लिए सात घंटे तक सरकारी एंबुलेंस का इंतजार करना पड़ा. आखिरकार, ₹3000 खर्च कर प्राइवेट एंबुलेंस बुलानी पड़ी.

जमशेदपुर : सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं के तमाम दावों की जमीनी हकीकत एक बार फिर उजागर हुई है. पोटका प्रखंड के कालिकापुर सबर बस्ती निवासी आदिम जनजाति (सबर समुदाय) की एक लाचार महिला को अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद घर जाने के लिए सरकारी एंबुलेंस तक नहीं मिली. पीड़िता सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक पूरे सात घंटे अस्पताल परिसर में एंबुलेंस के इंतजार में बैठी रही. आखिरकार जब एंबुलेंस नहीं मिली तो उसके परिजन पोटका से प्राइवेट एंबुलेंस लेकर आये और उसको लेकर गये. इसके लिए परिजनों को तीन हजार देना पड़ा.

सबर जाति के लिए नि:शुल्क एंबुलेंस उपलब्ध कराने का नियम

सबर जाति के लिए अस्पताल से नि:शुल्क एंबुलेंस उपलब्ध कराने का नियम है. कालिकापुर सबर बस्ती निवासी सोम सबर ने बताया - उसकी पत्नी की तबीयत खराब होने के कारण इलाज के लिए रविवार को एमजीएम अस्पताल में भर्ती कराया था. बुधवार की सुबह डॉक्टरों ने अस्पताल में इलाज के बाद सुबह 10 बजे ही छुट्टी दे दी गई थी.

शाम तक नहीं मिल सकी एंबुलेंस

इसके तुरंत बाद परिजनों ने अस्पताल में सरकारी एंबुलेंस के लिए अस्पताल के कर्मचारियों, एंबुलेंस ड्राइवर से संपर्क किया तो अस्पताल कर्मियों और संबंधित विभाग की ओर से बार-बार यही आश्वासन मिलता रहा कि एंबुलेंस कुछ ही देर में पहुंच रही है. इसी आस में मरीजों को लेकर परिजन बैठे हुए थे. शाम में जब एंबुलेंस नहीं मिली तो उसके परिजन पोटका से तीन हजार देकर प्राइवेट एंबुलेंस लेकर आये जिससे वे लोग घर गये.


प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By Chandra Shekhar

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.
Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >