Jamshedpur News : स्कूल में अभिभावकों से लिया जा रहा है री-एडमिशन शुल्क, शिकायत करें, होगी कार्रवाई : शिक्षा मंत्री

Jamshedpur News : प्राइवेट स्कूलों में नये सत्र की शुरुआत हो गयी है. कई स्कूलों में सत्र की शुरुआत होने के साथ ही अभिभावकों से मोटी रकम की वसूली की शिकायत भी मिली है.

– नियम का उल्लंघन करने वाले प्राइवेट स्कूलों पर होगी कार्रवाई

– राज्य सरकार निजी विद्यालयों की मनमानी को रोकने के लिए गंभीर, उठा रही सख्त कदम

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प्राइवेट स्कूलों में नये सत्र की शुरुआत हो गयी है. कई स्कूलों में सत्र की शुरुआत होने के साथ ही अभिभावकों से मोटी रकम की वसूली की शिकायत भी मिली है. उस रकम का नाम री-एडमिशन की बजाय कहीं एनुअल फीस तो कहीं डेवलपमेंट फीस तो कहीं इंफ्रास्ट्रक्चर फीस तो कहीं कॉशन मनी का रूप दिया गया है. उक्त बातें स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता मंत्री रामदास सोरेन ने गुरुवार को घोड़ाबांधा स्थित अपने आवास पर प्रभात खबर संवाददाता से बातचीत के दौरान कही. उन्होंने कहा कि राज्य में झारखंड शिक्षा न्यायाधिकरण (संशोधन) अधिनियम, 2017 पहले ही पारित हो चुका है. इसमें री-एडमिशन फीस लेने पर रोक लगायी गयी है. लेकिन, इसके बावजूद प्राइवेट स्कूल प्रबंधक अभिभावकों को अलग-अलग तरीके से परेशान कर रहे हैं. विशेष रूप से कॉपी, किताबें, स्कूल बैग, ड्रेस एवं री-एडमिशन के नाम पर अवैध शुल्क वसूली की शिकायतें प्राप्त हुई है. हालांकि, अभी तक इन शिकायतों को औपचारिक रूप से जिला स्तरीय समिति के समक्ष प्रस्तुत नहीं किया गया है. इसको लेकर अभिभावकों से अपील की गयी है कि वे विद्यालय समिति के माध्यम से अपनी शिकायतें जिला स्तरीय समिति को लिखित रूप में प्रस्तुत करें. यदि किसी विद्यालय द्वारा नियमों का उल्लंघन किया जाता है, तो संबंधित स्कूलों पर 50 हजार से ढाई लाख तक का आर्थिक दंड लगाया जायेगा. सरकार शिक्षण संस्थानों में पारदर्शिता एवं उत्तरदायित्व सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है. शिक्षा मंत्री ने कहा कि पूर्व की सरकारों ने न्यायाधिकरण बनने के बाद भी उस पर सही से ध्यान नहीं दिया, जिस वजह से प्राइवेट स्कूल मनमानी करते रहे. अब ऐसा नहीं होगा.

गरीब व अभिवंचित वर्ग के बच्चों के साथ हो रहा खिलवाड़

मंत्री रामदास सोरेन ने कहा कि शहर के प्राइवेट स्कूलों में गरीब व अभिवंचित वर्ग के बच्चों (1 से 14 वर्ष ) को कक्षा-1 से आठवीं तक पठन-पाठन नि:शुल्क कराया जाता है. उन बच्चों का मासिक शुल्क सरकार द्वारा दिया जाता है. लेकिन आठवीं पास करने के बाद गरीब व अभिवंचित कैटेगरी के बच्चे अटक जाते हैं. उसके परिवार वाले प्राइवेट स्कूलों की मोटी मासिक शुल्क दे नहीं पाते हैं और उन्हें मजबूरन स्कूल से आठवीं के बाद निकाल दिया जाता है. इस तरह उनकी स्कूली शिक्षा अधूरी रह जाती है. यह बहुत ही गंभीर मामला है. यह गरीब व अभिवंचित वर्ग के बच्चों के जीवन के साथ खिलवाड़ करने जैसा है. प्राइवेट स्कूलों में गरीब व अभिवंचित कैटेगरी के बच्चों की पढ़ाई कम से कम दसवीं तक तो होनी ही चाहिए. उन्होंने कहा कि इस तरह के कई मामले उनके पास आये हैं. उन्होंने निजी स्तर से पहल कर उनकी समस्या का समाधान किया है. लेकिन मामला चूंकि देश स्तर का है, इसलिए केंद्र सरकार को गरीब व अभिवंचित वर्ग के बच्चों की समस्या से अवगत कराते हुए ठोस समाधान के लिए पत्राचार कर रहे हैं.

रामदास सोरेन ने कहा कि आरटीइ अधिनियम में आठवीं की बजाय दसवीं करने के लिए पत्राचार किया जायेगा. एक्ट में संशोधन से यह संभव है. ताकि यदि कोई गरीब व अभिवंचित वर्ग का बच्चा प्राइवेट स्कूल में भी पढ़ता है तो सरकारी खर्च पर कम से कम दसवीं तक पढ़ाई जरूर कर सके. उन्होंने कहा कि सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस में बच्चों को 12वीं तक की शिक्षा राज्य सरकार द्वारा नि:शुल्क दी जाती है. इसके साथ ही बच्चों को व्यावसायिक कोर्स की भी पढ़ाई करायी जाती है. गरीब परिवारों से सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस में अपने बच्चों का दाखिला कराने का आह्वान किया.

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By RAJESH SINGH

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