ढोल-नगाड़ों के बीच निकली शोभायात्रा, कानों में भोजली खोंचकर मांगी खुशहाली, ये है मान्यता

जमशेदपुर में रक्षाबंधन के पावन अवसर पर 23वीं भोजली शोभायात्रा का भव्य आयोजन किया गया. नवविवाहित बहनों और बच्चों की पारंपरिक वेशभूषा और गीतों ने माहौल को उत्सवमय बना दिया. इस यात्रा ने समाज की एकजुटता और सांस्कृतिक विरासत को दर्शाया.

जमशेदपुर : रक्षाबंधन पर शुक्रवार को जमशेदपुर में लोकपरंपरा, संस्कृति और उल्लास का अनूठा संगम देखने को मिला. झारखंड लोधी क्षत्रिय महासभा की केंद्रीय कमेटी के नेतृत्व में न्यू सीपी क्लब (प्रगति क्लब), राम मंदिर, सोनारी से 23वीं भोजली शोभायात्रा धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ निकाली गई. रंग-बिरंगे परिधानों में सजी नवविवाहित बहनों, सजधज कर रथ पर सवार बच्चों और पारंपरिक भोजली गीतों से पूरा माहौल उत्सवी हो उठा. शोभायात्रा की पहली पंक्ति में नवविवाहित बहनें पारंपरिक रूप से सज-धजकर सिर और हाथों में भोजली की टोकरियां लेकर चल रही थीं. उनकी मौजूदगी ने शोभायात्रा को विशेष आकर्षण दिया. साथ ही कानों में भोजली खोंचकर खुशहाली की कामना की.

घोड़ों के रथ पर सवार हुए बच्चे

वहीं, घोड़ों के रथ पर सवार समाज के बच्चे अलग-अलग रूपों में सजकर लोगों का ध्यान खींच रहे थे. बच्चों की प्रस्तुतियों और शोभायात्रा की रौनक ने पूरे आयोजन को और जीवंत बना दिया. महासभा के पदाधिकारियों, कार्यकारिणी सदस्यों और महिला संगठन के सदस्यों ने आयोजन की व्यवस्था को संभाला और शोभायात्रा को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाया. भोजली शोभायात्रा सोनारी सीपी क्लब से शुरू होकर सुवर्णरेखा नदी तट पहुंची. यहां विधि-विधान और पारंपरिक रीति-रिवाज के साथ भोजली का विसर्जन किया गया.


भोजली शोभायात्रा में शामिल युवतियां.

नवविहाति बेटियों को मिला विशेष उपहार

विसर्जन के बाद सभी लोग वापस क्लब परिसर पहुंचे. यहां एक-दूसरे के कानों में भोजली खोंचकर सुख, समृद्धि, खुशहाली और आपसी प्रेम की शुभकामनाएं दी गईं. इस पारंपरिक रस्म ने पूरे आयोजन को भावनात्मक रंग दे दिया. नवविवाहित बेटियों को मिला विशेष उपहार इस वर्ष उज्जैना वाली नवविवाहित बेटियों भावना, निशा, कोमल और अंजू को महासभा की कमेटी की ओर से विशेष उपहार देकर सम्मानित किया गया. इस दौरान महिला संगठन की ओर से रंगारंग सांस्कृतिक एवं संगीतमय प्रस्तुतियां भी दी गईं. इससे कार्यक्रम का उत्साह और बढ़ गया.

समाज की एकजुटता और परंपरा का दिखा रंग

भोजली शोभायात्रा के माध्यम से समाज की सांस्कृतिक परंपरा और आपसी भाईचारे की झलक देखने को मिली. बड़ी संख्या में समाज के महिला-पुरुष और बच्चे आयोजन में शामिल हुए. पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ नई पीढ़ी की भागीदारी ने आयोजन को खास बना दिया. कार्यक्रम में पन्ना सिंह जंघेल, दीप सिंह, अशोक सिंह, ठाकुर सिंह, ललित कुमार जंघेल, सूरज लाल लोधी, हरिश्चंद्र वर्मा, योगेंद्र कुमार, जवाहर लाल लोधी, अर्जुन लोधी, मनबहल लोधी, सरजू प्रसाद, विनोद सिंह और निर्मल जंघेल सहित कई लोग मौजूद रहे. महिला संगठन की ओर से भारती सिंह, अंजनी देवी, वंदना जंघेल, गीतू कुमारी (बरखा), दीप्ति सिंह, जयंती देवी, कामिनी सिंह, रंभा, ज्योति सिंह, हरेश्वरी देवी और अंजनी सिंह समेत अन्य सदस्य उपस्थित रहीं.

ये है मान्यता

भोजली लोधी समाज की समृद्ध लोकपरंपरा और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है. रक्षाबंधन पर झारखंड लोधी क्षत्रिय महासभा की ओर से हर वर्ष भोजली शोभायात्रा निकाली जाती है. इस परंपरा में नवविवाहित बहनों की विशेष भूमिका रहती है. वे पारंपरिक रूप से सज-धजकर सिर और हाथों में भोजली की टोकरियां लेकर शोभायात्रा में शामिल होती हैं. इसके बाद भोजली का नदी में विधिवत विसर्जन किया जाता है. विसर्जन के पश्चात एक-दूसरे के कान में भोजली खोंचकर सुख-समृद्धि, खुशहाली और आपसी प्रेम की शुभकामनाएं देने की परंपरा है. भोजली को प्रकृति, परिवार की खुशहाली और सामाजिक एकता से जोड़कर देखा जाता है. लोधी समाज के लिए यह आयोजन केवल धार्मिक रस्म नहीं, बल्कि अपनी लोकसंस्कृति और परंपरा को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का माध्यम भी है. जमशेदपुर में महासभा लंबे समय से इस परंपरा को सामूहिक रूप से निभाती आ रही है.

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By Rima rani dey

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.
Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >