Jamshedpur News : प्राइवेट स्कूलों का सरकार पर 10 करोड़ रुपये बकाया, हाइकोर्ट जायेंगे प्रबंधन

शहर के प्राइवेट स्कूल प्रबंधकों का स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग पर करीब 10 करोड़ रुपये बकाया है.

मुख्य बातें :

चार साल से रोक दी गयी है गरीब बच्चों को पढ़ाने के एवज में दी जाने वाली राशि

हर साल बिना किसी रोकटोक के हो रहा है प्राइवेट स्कूल में आरक्षित कैटेगरी के बच्चों का एडमिशन

जमशेदपुर में टाटा सबलीज की जमीन पर बने 40 स्कूलों का फंसा है मामला

झारखंड में 2011 से प्रति छात्र 425 रुपये की राशि दी जाती है, जो आज तक नहीं रिन्युअल हुआ

प्रति छात्र 710 रुपये की राशि तय करने का तैयार हुआ प्रस्ताव, लेकिन आज तक लागू नहीं हुआ

Jamshedpur (Sandeep Savarna) :

शहर के प्राइवेट स्कूल प्रबंधकों का स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग पर करीब 10 करोड़ रुपये बकाया है. स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने जमशेदपुर के प्राइवेट स्कूलों में 25 प्रतिशत सीटों पर गरीब एवं अभिवंचित वर्ग के बच्चों को पढ़ाने के एवज में दी जाने वाली राशि पर रोक लगा दी है. वर्ष 2021 से अब तक यह राशि नहीं जारी की गयी है. इसे लेकर अनएडेड जमशेदपुर प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन में आक्रोश है. गुरुवार को एसोसिएशन की आमसभा में इस मुद्दे पर सरकार से दो-दो हाथ करने का निर्णय लिया गया. बताया गया कि एसोसिएशन के सदस्यों ने पिछले दिनों डीसी कर्ण सत्यार्थी को एक ज्ञापन सौंप कर वस्तु-स्थिति से अवगत कराया था. डीसी ने पूरे मामले की जानकारी डीएसइ आशीष पांडेय से ली. जिसमें झारखंड राज्य परियोजना निदेशक के पत्र से जुड़ी जानकारी देते हुए बताया गया कि लीज या सब लीज की जमीन पर बने प्राइवेट स्कूलों को सरकारी सहायता प्राप्त स्कूल की कैटेगरी में रखा गया है और जिस स्कूल को सरकारी सहायता प्राप्त स्कूल की कैटेगरी में रखा गया है, उन्हें आरक्षित श्रेणी के बच्चों को पढ़ाने के एवज में अनुदान की राशि नहीं दी जा सकती है. गुरुवार की आमसभा में डीसी द्वारा मौखिक रूप से दी गयी जानकारी को सार्वजनिक किया गया. साथ ही कहा गया कि अगले सप्ताह डीसी के स्तर से लिखित रूप में यह आदेश दे दिया जायेगा कि प्राइवेट स्कूलों को अनुदान की राशि नहीं दी जा सकती है. उक्त पत्र के आधार पर सभी स्कूल प्रबंधकों ने हाइकोर्ट जाने का निर्णय लिया. इस पर सर्वसम्मति से फैसला हो गया.

आखिर कहां फंसा पेच

जमशेदपुर में 40 प्राइवेट स्कूल ऐसे हैं, जो टाटा लीज की जमीन पर बने हैं. स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव की अध्यक्षता में 17 व 18 अगस्त 2022 को रांची में आयोजित एक बैठक में यह निर्देश दिया गया कि अगर कोई प्राइवेट स्कूल राज्य सरकार द्वारा अनुदान के रूप में दी गयी जमीन पर बनी है, या उन्हें राज्य सरकार द्वारा अनुदान के रूप में कोई अन्य सुविधा मुहैया करायी गयी है, तो इन स्कूलों को गरीब एवं अभिवंचित वर्ग के बच्चों को पढ़ाने के एवज में किसी भी प्रकार की फीस का भुगतान नहीं होगा. राज्य शिक्षा परियोजना निदेशक ने इससे संबंधित लिखित रूप से आदेश जारी किया, जिसके बाद से टाटा लीज की जमीन पर बने स्कूलों को गरीब व अभिवंचित वर्ग के बच्चों को पढ़ाने के एवज में मिलने वाली प्रतिमाह 425 रुपये की राशि पर रोक लगा दी गयी है. जानकारी के अनुसार प्राइवेट स्कूलों का करीब 10 करोड़ रुपये बकाया है.

राज्य के तीन जिले के स्कूल संचालक हैं प्रभावित

राज्य शिक्षा परियोजना निदेशक के पत्र से राज्य के 21 जिले के स्कूल प्रबंधकों को किसी प्रकार की कोई परेशानी नहीं है. इस पत्र से जमशेदपुर के टाटा सबलीज क्षेत्र में बने स्कूल, धनबाद व बोकारो के स्कूल संचालक सबसे अधिक प्रभावित हैं.

टाटा लीज की जमीन पर होने का अर्थ सरकार की सहायता नहीं मिलना है, समीक्षा हो

स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग की ओर से जारी आदेश के बाद झारखंड अनएडेड प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन ने इस मामले में यह दलील दिया कि टाटा लीज की जमीन पर होने का अर्थ सरकार की सहायता मिलना नहीं है. नये सिरे से इसकी समीक्षा की बात कही. एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर कहा कि सरकार के स्तर पर सरकारी सहायता प्राप्त होने की व्याख्या गलत की गयी है. आरोप लगाया गया कि पिछले कुछ वर्षों से जिस प्रकार से प्राइवेट स्कूलों को टारगेट कर परेशान किया जा रहा है, यह सही नहीं है. सरकार ने 2011 में 425 रुपया प्रतिमाह तय किया था, 2025 में भी वही है. जबकि हर चीज की कीमत बढ़ी, लेकिन आरक्षित श्रेणी के बच्चों की फीस नहीं बढ़ी. इसके बावजूद हम पढ़ाते रहे, अब उस पर भी रोक लगा दी गयी है. यह अन्याय है.

जानें किस साल आरक्षित श्रेणी में कितने बच्चों का हुआ एडमिशन

2025 : 14042024 : 13392023 : 1206

2022 : 10582021 : 958

2020 : 8242019 : 730

एक रुपये में मिली है टाटा लीज की जमीन

शहर के 40 प्राइवेट स्कूल टाटा लीज की जमीन पर बनी है. इस प्रकार की जमीन पर बने स्कूलों को टाटा स्टील ने टाटा स्टील कर्मियों के साथ ही शहर के लोगों को बेहतर शिक्षा प्रदान करने के लिए लीज पर जमीन दी. जानकारी के अनुसार अधिकांश प्राइवेट स्कूलों को एक रुपये में लीज पर जमीन दी गयी है. हालांकि, इसके एवज में कई स्कूलों में टाटा स्टील कर्मियों के बच्चों के लिए सीटें आरक्षित की गयी है, वहीं टाटा स्टील कर्मियों के बच्चों को फीस में रियायत भी दी जाती है.

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Author: RAJESH SINGH

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