घाटशिला : बारिश के मौसम में सड़कें सिर्फ कीचड़ और गड्ढों में नहीं बदलतीं, कई बार यही बदहाल रास्ते किसी की जिंदगी के लिए बड़ी चुनौती बन जाते हैं. घाटशिला के झाटीझरना क्षेत्र के बालीडीह गांव में कुछ ऐसा ही दर्दनाक नजारा सामने आया. प्रसव के लिए अस्पताल जाने वाली गर्भवती महिला को एंबुलेंस तक पहुंचने के लिए करीब एक किलोमीटर दलदली रास्ता पैदल तय करना पड़ा.
जर्जर सड़क के कारण आगे नहीं बढ़ सकी एंबुलेंस
बालीडीह निवासी रवि कर्मकार की पत्नी सीमा कर्मकार को प्रसव के लिए घाटशिला अनुमंडल अस्पताल ले जाना था. इसके लिए ममता वाहन को गांव भेजा गया, लेकिन गांव तक पहुंचने वाली सड़क बारिश के कारण इस कदर दलदल में तब्दील हो चुकी थी कि वाहन आगे नहीं बढ़ सका. इसके बाद परिवार के लोगों के सामने कोई दूसरा रास्ता नहीं था.
किसी परीक्षा से कम नहीं था सफर
गर्भवती सीमा को परिजनों की मदद से करीब एक किलोमीटर तक पैदल चलकर एंबुलेंस तक पहुंचना पड़ा. प्रसव पीड़ा के बीच कीचड़ भरे और गड्ढों वाले रास्ते पर उनका यह सफर किसी परीक्षा से कम नहीं था. आखिरकार एंबुलेंस तक पहुंचने के बाद उन्हें घाटशिला अनुमंडल अस्पताल लाया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है.
गांवों की जमीनी हकीकत पर उठ रहे कई सवाल
बालीडीह की इस घटना ने ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सुविधा और सड़क व्यवस्था की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े कर दिए हैं. जिस रास्ते से एंबुलेंस और ममता वाहन को सीधे गांव तक पहुंचना चाहिए, वहां एक गर्भवती महिला को प्रसव पीड़ा के बीच पैदल चलकर वाहन तक पहुंचना पड़ा. ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की खराब स्थिति के कारण कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है.
झाटीझरना सड़क की मरम्मत करने की मांग
उन्होंने प्रशासन से झाटीझरना की सड़क की जल्द मरम्मत कराने की मांग की है, ताकि आने वाले दिनों में किसी मरीज या गर्भवती महिला को अस्पताल पहुंचने के लिए इस तरह की परेशानी न उठानी पड़े. बालीडीह की यह तस्वीर सिर्फ एक खराब सड़क की कहानी नहीं है, बल्कि उस दर्द की तस्वीर है जहां अस्पताल कुछ किलोमीटर दूर होने के बावजूद बदहाल सड़क के कारण इलाज तक पहुंचना ही सबसे बड़ी चुनौती बन गया है.
