Jamshedpur news.
आदिवासी संताल समाज की एक बैठक शनिवार को गिरिडीह के परिसदन में हुई. इस बैठक में झारखंड, बंगाल व ओडिशा के आदिवासी स्वशासन व्यवस्था के प्रमुख माझी बाबा, परगना बाबा, पारानिक बाबा, शिक्षाविद, बुद्धिजीवी व समाजसेवी आदि शामिल हुए. बैठक में पारसनाथ पर्वत को लेकर उठे विवाद पर विचार विमर्श किया गया.वक्ताओं ने कहा कि पारसनाथ पर्वत का प्राचीन नाम मरांगबुरू है. आदिवासी सर्वोच्च पूजा स्थल जुगजाहेर इसी पर्वत पर है. मरांगबुरू आदिवासी संताल समुदाय का आस्था का केंद्र है, लेकिन वर्तमान समय में मरांगबुरू से आदिवासियों को बेदखल करने का प्रयास किया जा रहा है. इस बैठक में संताल समाज के लोगों ने विचार-विमर्श करने के बाद निर्णय लिया कि वे मरांगबुरू के अतिक्रमण के विरोध में 12 मार्च को प्रतिरोध मार्च करेंगे. यह प्रतिरोध मार्च मधुबन फुटबॉल मैदान से दिशोम मांझी थान तक निकालेंगे. प्रतिरोध में सभी आदिवासी-मूलवासी अपने पारंपरिक हथियार तीर-धनुष, वाद्ययंत्र, व सरना झंडा के साथ शामिल होंगे. बैठक में धाड़ दिशोम देश पारानिक सह तालसा माझी बाबा दुर्गाचरण हेंब्रम, रमेश टुडू, अनिल कुमार टुडू, सोनाराम माझी, रमेश हेंब्रम, सुनील लकड़ा, शिबू मुर्मू, महेश मरांडी, जयवीर हांसदा, मानकी टुडू, विष्णु किस्कू, जसाई मार्डी, बिंदे सोरेन, कृष्णा हांसदा, शंकर सोरेन, प्रदीप सोरेन, पन्नालाल मुर्मू, रामलाल मुर्मू, सुधीर बास्के, चरण मुर्मू, सुरेंद्र टुडू, अनिल टुडू समेत काफी संख्या में समाज के लोग शामिल हुए.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
