जमशेदपुर : पूर्वी सिंहभूम जिले के घने जंगलों और चारों ओर फैली पहाड़ियों के बीच एक ऐसी जगह मौजूद है, जिसके बारे में जानकर शायद आपको भी यकीन करना मुश्किल हो जाए. जिला मुख्यालय जमशेदपुर से करीब 70 किलोमीटर दूर पूर्वी सिंहभूम जिला के डुमरिया के लखाईडीह गांव के पास पहाड़ों के बीच एक झरना है, जिसे स्थानीय लोग राम-लक्ष्मण पूजा झरना के नाम से जानते हैं. इसी झरने के आसपास एक चट्टान पर बनी लंबी रेखा को ग्रामीण आज भी ‘लक्ष्मण रेखा’ मानते हैं.
पुरुष इस रेखा को अकेले पार नहीं कर पाते
खास बात यह है कि स्थानीय मान्यता के अनुसार पुरुष इस रेखा को अकेले पार नहीं कर पाते. लखाईडीह गांव चार अलग-अलग पहाड़ियों की गोद में बसा है. इसके आसपास का इलाका सिर्फ प्राकृतिक सुंदरता के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी पुरानी लोककथाओं और धार्मिक मान्यताओं के लिए भी जाना जाता है.
राजाबासा गांव के राजा से मिलने आए थे राम-सीता
गांव के पास पहाड़ पर स्थित इस झरने को लेकर ग्रामीणों का विश्वास है कि रामायण काल में भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण इस क्षेत्र से होकर गुजरे थे. मान्यता है कि उस दौरान वे राजाबासा गांव के राजा से मिलने आए थे. इसी दौरान माता सीता पहाड़ पर एक विशेष पत्थर पर बैठी थीं. उनकी सुरक्षा के लिए लक्ष्मण ने वहां एक रेखा खींची थी. स्थानीय लोगों का दावा है कि उस रेखा का निशान आज भी उसी चट्टान पर दिखाई देता है.
लक्ष्मण रेखा पार करने पर पत्थर पर गिर जाते हैं लोग
यही वजह है कि इस जगह को लेकर लोगों की उत्सुकता आज भी बनी हुई है. ग्रामीणों के अनुसार, जो पुरुष अकेले इस रेखा को पार करने की कोशिश करते हैं, वे रेखा के पास स्थित बड़े पत्थर पर जाकर गिर जाते हैं. वहीं, मान्यता है कि किसी महिला के साथ होने पर पुरुष इस रेखा को पार कर सकता है. इस दावे का कोई वैज्ञानिक या पुरातात्विक प्रमाण सामने नहीं आया है, लेकिन पीढ़ियों से चली आ रही यह लोकमान्यता आज भी ग्रामीणों की आस्था का हिस्सा है.
माता सीता ने झरना में किया था स्नान
इस कहानी को और रोचक बनाता है यहां मौजूद सीता झरना. राम-लक्ष्मण पूजा झरना से करीब एक किलोमीटर नीचे पहाड़ों के बीच यह झरना स्थित है. स्थानीय मान्यता है कि राजाबासा आगमन के दौरान माता सीता ने इसी झरने में स्नान किया था. पहाड़ों और घने जंगलों के बीच स्थित यह जगह इतनी दुर्गम है कि यहां तक पहुंचना भी आसान नहीं है. रास्ता काफी कठिन है और राम-लक्ष्मण पूजा झरना तक पहुंचने के लिए भी काफी मशक्कत करनी पड़ती है. लखाईडीह के ग्रामीण इस पूरे इलाके को राम, लक्ष्मण और सीता से जुड़ी अपनी पुरानी विरासत मानते हैं.
सरकार दे ध्यान तो बन सकता है पर्यटन का केंद्र
उनका कहना है कि राम-लक्ष्मण पूजा झरना और सीता झरना का ऐतिहासिक महत्व काफी पुराना है. प्राकृतिक रूप से बेहद खूबसूरत होने के बावजूद इन जगहों पर अब तक वह ध्यान नहीं दिया गया, जिसकी जरूरत है. ग्रामीणों का मानना है कि अगर यहां तक पहुंचने के लिए बेहतर रास्ता और जरूरी सुविधाएं विकसित की जाएं, तो यह स्थान आस्था के साथ-साथ पर्यटन का भी बड़ा केंद्र बन सकता है.
