25 वर्षों से बंद पड़ा है 350 बेड वाला ये अस्पताल, कंपनी बंद होने के साथ छिन गयी स्वास्थ्य सुविधा

मुसाबनी माइंस अस्पताल 25 वर्षों से बंद पड़ा है, जिससे स्थानीय लोगों को इलाज के लिए भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जानें पूरी खबर।

मुसाबनी : एचसीएल की खदानों की बंदी के बाद कंपनी ने मुसाबनी माइंस अस्पताल को 2001 में बंद कर दिया. पिछले 25 वर्षों से 350 बेड का अत्याधुनिक अस्पताल भवन बंद पड़ा है. आधुनिक चिकित्सा का यह महत्वपूर्ण संस्थान खंडहर में तब्दील हो गया है. माइंस में काम करने वाले अधिकारी, कर्मचारी, मजदूर और उनके परिवार के अलावे मुसाबनी, डुमरिया, गुड़ाबांदा, घाटशिला, पोटका के सुदूर गांव के लोगों को माइंस अस्पताल में इलाज की सुविधा मिलती थी.

बदहाल हो गयी चिकित्सा व्यवस्था

अस्पताल के बंद होने से क्षेत्र में चिकित्सा व्यवस्था बदहाल हो गयी. क्षेत्र के लोग समय पर उचित इलाज के अभाव में दम तोड़ रहे हैं. माइंस बंदी से रोजगार के साथ-साथ क्षेत्र के लोगों को चिकित्सा से भी वंचित होना पड़ा है. प्रखंड में चिकित्सा की कोई कारगर व्यवस्था नहीं रहने से बीमार होने पर पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल के झाड़ग्राम, ओड़िसा के बारीपदा, भुवनेश्वर तथा जमशेदपुर पर निर्भर रहना पड़ता है. वहीं, आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को बाहर इलाज करने में परेशानी होती है. गरीब लोग स्थानीय डॉक्टर या झाड़-फूक का सहारा लेने को मजबूर हैं.

बंद पड़े माइंस अस्पताल को फिर से खोलने के कई प्रयास हुए विफल

बंद पड़े माइंस अस्पताल को फिर से खोलने के कई प्रयास हुए लेकिन अब तक सभी प्रयास विफल साबित हुए हैं. 25 वर्षों से बंद अस्पताल फिर से खुलने का सपना अब तक हवा हवाई साबित हुआ है. अस्पताल के दो मंजिला भवन के छत पर बड़े-बड़े पेड़ उगे हैं. अस्पताल भवन झाड़ियां से घिरा है. भवन के छज्जे और खिड़कियां टूट कर गिर रहे हैं. करोड़ों की लागत से बने अत्याधुनिक अस्पताल भवन बिना उपयोग के ही खंडहर में तब्दील हो गया.

मुसाबनी माइंस अस्पताल को फिर से खोलने का प्रयास

राज्य के प्रथम स्वास्थ्य मंत्री डॉ दिनेश षाड़ंगी ने किया किया था. उन्होंने बंद पड़े माइंस अस्पताल को खोलने के लिए मणिपाल हॉस्पिटल ग्रुप के साथ वार्ता कर अस्पताल को फिर से चालू करने तथा अनुमंडल में एक मेडिकल कॉलेज खोलने की पहल की थी. इसके बाद तत्कालीन केंद्रीय वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने शारदा ट्रस्ट के माध्यम से बंद पड़े माइंस अस्पताल को खोलने तथा मेडिकल कॉलेज के लिए पहल की थी.

2005 में बंद पड़े माइंस अस्पताल की खुलने की संभावना बनी थी

2005 में मुसाबनी और राखा टाउनशिप का झारखंड सरकार द्वारा अधिग्रहण करने के बाद बंद पड़े माइंस अस्पताल के फिर से खुलने की संभावना बनी. कोलकाता, जमशेदपुर समेत कई नामी अस्पताल के संचालकों ने समय-समय पर बंद पड़े माइंस अस्पताल का दौरा कर इसे फिर से खोलने का प्रयास किया. प्रत्येक चुनाव में बंद अस्पताल को फिर से चालू करने का चुनावी आश्वासन भी क्षेत्र की जनता को दिया गया लेकिन 25 वर्ष गुजर गये अब तक सभी प्रयास तथा आश्वासन खोखले साबित हुए हैं. आधुनिक अस्पताल भवन खोलने की उम्मीद में खंडहर में तब्दील हो गया है. बंद पड़े अस्पताल खुलने की उम्मीद लगाए क्षेत्र के लोग अब निराश हैं और पुराने दिनों की याद कर मजबूरी में वर्तमान चिकित्सा की बदहाल व्यवस्था को झेल रहे है.फोटो: फोटो में नाम लिखा है.

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लेखक के बारे में

By मो. युनूस परवेज

मो. युनूस परवेज वर्ष 1995 से पत्रकारिता कर रहे हैं. उन्होंने घाटशिला महाविद्यालय और रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में स्नातक और राजनीतिक विज्ञान ऑनर्स की डिग्री हासिल की है. इनकी राजनीति, अपराध, नक्सलवाद, खेल, शिक्षा और खेती किसानी की खबरों में विशेष रुचि है. डिजिटल जर्नलिज्म में 5 साल का अनुभव है.

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