Jamshedpur News : टीएमएच से मेडिकल सुविधा नहीं मिलने के कारण परेशान हैं कोल्हान के सात हजार से अधिक पूर्व सैनिक

Jamshedpur News : सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद कोल्हान के लगभग सात हजार से अधिक पूर्व सैनिकों को टीएमएच से मेडिकल सुविधा नहीं मिल रही है.

सैन्य अधिकारी, स्टेशन कमांडर, सांसद, विधायक, टाटा प्रबंधन समेत अन्य के माध्यम से लगा चुके हैं फरियाद, नहीं निकला समाधान

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सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद कोल्हान के लगभग सात हजार से अधिक पूर्व सैनिकों को टीएमएच से मेडिकल सुविधा नहीं मिल रही है. पूर्व सैनिकों को इसीएचएस (इलेक्टिव कंट्रीब्यूटरी हेल्थ स्कीम) के तहत मेडिकल की सुविधा मिलती है. इसका सेंटर सोनारी आर्मी कैंप के अलावा आपात स्थिति में टीएमएच, टिनप्लेट व तामोलिया स्थित ब्रह्मानंद अस्पताल में पूर्व सैनिक खुद का व परिवार का इलाज करवा लेते थे. 12-14 साल पहले तक सबकुछ ठीक-ठाक चल रहा था, लेकिन कुछ विभागीय कारणों से अचानक टीएमएच व उसके बाद टिनप्लेट से मिलने वाली मेडिकल सुविधा बंद कर दी गयी. पूर्व सैनिकों को अब ब्रह्मानंद अस्पताल से इसीएचएस के तहत मेडिकल सुविधा मिलती है. वहां ओपीडी की सुविधा तो है, लेकिन इंडोर में कुछ आवश्यक सेवाओं का अभाव है, जिस कारण मजबूरी में पूर्व सैनिकों को रांची या कोलकाता का रुख करना पड़ता है. टीएमएच से पूर्व की भांति सुविधा-सेवा मिले, इसको लेकर दर्जनों बार सांसद, विधायक, टाटा स्टील के प्रबंध निदेशक, सोनारी आर्मी स्टेशन के प्रमुख, सैनिक कल्याण निदेशक के अलावा आर्मी के वरीय अधिकारियों के साथ पत्राचार किया गया, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो पाया. हालांकि पूर्व सैनिकों ने हार नहीं मानी है, उनका कहना है कि जब उन्होंने मुश्किल चोटियों पर राह आसान कर ली, तो फिर इस समस्या का भी समाधान अवश्य निकलेगा. पूर्व सैनिकों के अनुसार टीएमएच एवं पैनल अस्पतालों में सीडीए द्वारा समय पर बिल का भुगतान नहीं किये जाने के कारण उनका इलाज करने से मना कर दिया गया. बाद में ब्रह्मानंद अस्पताल को पैनलबद्ध किया गया. एक सितंबर से बिल बकाया होने के कारण वहां भी इलाज से मना कर दिया गया. वर्तमान में हालत यह है कि शहर का कोई भी अस्पताल इसीएचएस के माध्यम से पूर्व सैनिकों को सेवा देने की स्थिति में नहीं है.

पूर्व सैनिकों ने रक्षा राज्यमंत्री संजय सेठ से अपील है कि वे पूर्व सैनिकों के इलाज को प्राथमिकता में रखते हुए टाटा प्रबंधन से बात कर इस समस्या का समाधान करायें. यह व्यवस्था कर दें कि उनका इलाज टीएमएच, टाटा मोटर्स, टिनप्लेट व ब्रह्मानंद अस्पताल में कैशलेस हो सके.

1. टीएमएच हर किसी की पहुंच का अस्पताल है. मौजूदा स्थिति में ब्रह्मानंद अस्पताल में सुविधा मिल रही है, जो नाकाफी है. जिसके कारण रांची या कोलकाता जाने को मजबूर होना पड़ता है. रक्षा मंत्रालय को इसे गंभीरता से लेना चाहिए, ताकि हम सैनिक अपना इलाज करा सकें, किसी के सामने नाहक हाथ नहीं फैलाने पड़े.

वरुण कुमार

2. रांची, पटना समेत देश के कई अन्य शहरों में इसीएचएस के तहत कई अस्पताल-नर्सिंग होम पैनल में शामिल हैं, जहां पूर्व सैनिक अपना इलाज बिना किसी संकोच के कराते हैं. जब जमशेदपुर जैसे बड़े शहर की बात आती है, तो यहां यह सुविधा नहीं के बराबर है, जिससे काफी परेशानी होती है.

सतीश प्रसाद

3. किसी भी आपात स्थिति में टीएमएच का ही रुख करना पड़ता है. रक्षा मंत्रालय से टाटा प्रबंधन का बिलिंग के मामले में क्या विवाद हुआ, पता नहीं. इसका समाधान नहीं निकाल कर पूरी सेवा ही ठप कर 20 हजार से अधिक सैनिकों व उनके परिजनों को परेशानी में डाल देना, उचित नहीं है.

संतोष कुमार सिंह

4. एक तो बीमार और ऊपर से रात के वक्त ब्रह्मानंद अस्पताल जाना एक बड़ी चुनौती है. टीएमएच सभी की पहुंच में है, जहां किसी भी स्थिति में मरीज किसी की मदद से पहुंचाया जा सकता है. ऐसे में रक्षा मंत्रालय को चाहिए कि वह इस समस्या का समाधान कर उनके इलाज की राह आसान बनायें.

परमहंस यादव

5. टीएमएच में पैनल की संबद्धता समाप्त होने पर सोनारी इसीएचएस से इस मामले को वरीय अधिकारियों के समक्ष उठाने की बात कही गयी. सोनारी इसीएचएस में जेओसी समेत अन्य अधिकारियों को उन्होंने पूरी टीम के साथ शिकायत की थी, फिर भी इसका कोई समाधान नहीं निकलता दिख रहा है.

अमित कुमार झा

6. सैन्यकर्मी काफी सम्मान के साथ अपने दायित्वों का निर्वाह करते हुए सेवानिवृत होते हैं. उन्हें उम्मीद रहती है कि उनके साथ भविष्य में समाज के साथ-साथ विभिन्न संस्थान भी खड़े रहेंगे, लेकिन जब इलाज की बारी आती है, तो कोई न कोई अड़ंगा यहां लगा कर हमें पंगू की स्थिति में ला दिया जाता है.

अजय कुमार सिंह

7. सोनारी इसीएचएस में बीपी, शुगर समेत अन्य वैसी दवाएं मिलती हैं, जो नित्य प्रयोग में आती है. रक्त संबंधी साधारण जांच होती है. अधिकांश मामलों में जांच के लिए बाहर जाना पड़ता है. ब्रह्मानंद अस्पताल में ओपीडी में यदि एमआरआइ लिख दिया गया, तो उसके लिए भी रांची जाना पड़ता है.

किशोरी प्रसादB

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Author: RAJESH SINGH

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