जमशेदपुर: एमजीएम अस्पताल के नेत्र रोग विभाग में अत्याधुनिक फेको मशीन खराब होने के कारण मरीजों का ऑपरेशन पुरानी यानी मैनुअल विधि से किया जा रहा है. वहीं, निजी अस्पतालों में आयुष्मान भारत योजना के तहत मोतियाबिंद सर्जरी बंद होने से जरूरतमंदों को इलाज के लिए 15 से 30 हजार रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं.
एमजीएम अस्पताल के नेत्र रोग विभागाध्यक्ष डॉ. उदय शंकर सिंह ने बताया कि पुरानी फेको मशीन खराब हो चुकी है और नयी मशीन की खरीद प्रक्रिया जारी है. उन्होंने स्पष्ट किया कि अस्पताल में ज्यादातर ग्रामीण बुजुर्ग मरीज आते हैं, जिनका मोतियाबिंद काफी पक चुका होता है. ऐसे मामलों में फेको विधि कारगर नहीं होती, इसलिए मैनुअल सर्जरी की जाती है. बीते नौ माह में यहां करीब 120 मरीजों का सफल ऑपरेशन किया गया है.
निजी अस्पतालों में जांच के चलते आयुष्मान योजना बंद
दूसरी ओर, निजी अस्पतालों में आयुष्मान योजना के तहत फेको सर्जरी बंद होने से मरीजों पर आर्थिक बोझ पड़ रहा है. विभागीय अधिकारियों के अनुसार, कई निजी अस्पतालों द्वारा आयुष्मान और अंधापन निवारण कार्यक्रम, दोनों से क्लेम लेने की शिकायत मिली थी, जिसकी जांच चल रही है.
जांच पूरी होने के बाद ही सेवा फिर बहाल होगी. इधर, आनंद मार्ग प्रचारक संघ के सुनील आनंद ने गरीबों के हित में आयुष्मान के तहत फेको सर्जरी अविलंब शुरू कराने की मांग की है.
