वरीय संवाददाता, जमशेदपुर
मानगो ब्रिज पर लगे जाम के बीच एंबुलेंस में बच्चे के जन्म के चर्चित मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने दर्ज शिकायत पर कार्रवाई करते हुए केस बंद कर दिया है. आयोग ने मामले को अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर बताते हुए 'डिसमिस्ड इन लिमिनी' के तहत याचिका खारिज कर दी. 22 जुलाई को केस में आयोग ने अंतिम आदेश जारी किया है.
क्या था मामला ?
3 मई 2025 को मानगो निवासी माला रानी भगत को प्रसव पीड़ा होने के बाद एंबुलेंस से अस्पताल ले जाया जा रहा था. वह डुमरिया से एमजीएम अस्पताल जा रही थीं. इसी दौरान मानगो ब्रिज पर भारी ट्रैफिक जाम में एंबुलेंस फंस गई. जाम इतना लंबा था कि समय पर अस्पताल पहुंचना संभव नहीं हो सका और महिला ने एंबुलेंस में ही बच्चे को जन्म दिया. इस घटना के बाद शहर में ट्रैफिक व्यवस्था और प्रशासनिक लापरवाही को लेकर सवाल उठे थे.
इसी मामले को लेकर मानवाधिकार कार्यकर्ता मनोज मिश्रा ने 24 मई 2025 को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी. शिकायत में प्रशासनिक लापरवाही, व्यवस्था की कमी और मानवाधिकारों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए कार्रवाई करने तथा पीड़िता को राहत देने की मांग की गई थी. आयोग ने शिकायत पर विचार करने के बाद इसे अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर माना और प्राथमिक स्तर पर ही याचिका को खारिज कर दिया. इसके बाद मामले को समाप्त घोषित कर दिया गया.
