वरीय संवाददाता, जमशेदपुरबाहुड़ा यात्रा संपन्न होने के बाद भगवान जगन्नाथ, भ्राता बलभद्र और बहन सुभद्रा अपने निवास स्थान श्रीमंदिर के सिंहद्वार के सामने अपने-अपने विशाल रथों पर विराजमान होकर भक्तों को अलौकिक दर्शन दे रहे हैं. इस विशेष एवं पावन अवसर पर महाप्रभु का अत्यंत आकर्षक 'सुना वेश'(सोना वेश) रूप में भव्य शृंगार किया गया है, जिसे 'राजराजेश्वर वेश' भी कहा जाता है.
स्वर्ण आभूषणों से अलंकृत हुए महाप्रभु
मान्यता और परंपरा के अनुसार, मौसी बाड़ी से अपने मंदिर लौटने के दूसरे दिन एकादशी के अवसर पर महाप्रभु को सोना वेश में सज्जित किया जाता है. इसी जगन्नाथ संस्कृति और परंपरा के तहत कदमा शास्त्रीनगर स्थित श्री राधाकृष्ण एवं जगन्नाथ मंदिर में महाप्रभु मौसी के घर से वापस आने के बाद सोने के आभूषणों से सुसज्जित होकर श्रद्धालुओं को दर्शन दिये. स्वर्ण आभूषणों में दमकते महाप्रभु के इस दिव्य रूप का दर्शन करने के लिए मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की लंबी कतार लगी रही.
भजन संध्या का आयोजन, बांटा गया प्रसादइस पावन अवसर पर श्रद्धालुओं ने मिलकर भव्य भजन संध्या का आयोजन किया, जिसमें भक्ति गीतों से माहौल भक्तिमय हो उठा. दर्शन के पश्चात मंदिर समिति की ओर से भक्तों के बीच महाप्रसाद का वितरण किया गया. कार्यक्रम को सफल बनाने में मंदिर समिति के सुकांत दास, सीफन मोहंती, विश्वनाथ पात्रो, रबी बेउरा और अशोक सामंतराय आदि सदस्यों का सराहनीय योगदान रहा.
