सर्वे से नहीं माने ग्रामीण, बोले- कागज नहीं, धरातल पर चाहिए काम, जानें सांसद ने क्या कहा

करनडीह रेलवे फाटक से परसुडीह शीतला चौक तक दूषित पानी की निकासी को लेकर विवाद गहरा गया है. जमशेदपुर के सांसद विद्युत वरण महतो ने खुद मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और लोगों से बातचीत की. हालांकि, ग्रामसभा प्रशासन की कागजी कार्रवाई से असंतुष्ट है.

जमशेदपुर : करनडीह रेलवे फाटक से लेकर परसुडीह शीतला चौक तक बहुमंजिला फ्लैटों से निकलने वाले दूषित पानी की निकासी को लेकर शुरू हुआ विवाद गहराता जा रहा है. गंभीर होती समस्या के स्थायी समाधान की पहल करते हुए बुधवार को जमशेदपुर के सांसद विद्युत वरण महतो खुद करनडीह रेलवे फाटक के समीप पहुंचे. उन्होंने ग्राउंड जीरो पर उतरकर पूरी स्थिति का जायजा लिया. करनडीह ग्रामसभा के प्रतिनिधियों व स्थानीय नागरिकों से बातचीत कर मामले की विस्तृत जानकारी ली. सांसद ने स्वीकार किया कि जल निकासी की समस्या काफी जटिल है. लेकिन, आम जनता की सहूलियत के लिए इसका त्वरित समाधान निकालना बहुत जरूरी है. सांसद के आने की जानकारी मिलने के बाद सलखू सोरेन, मुखिया सरस्वती टुडू, मुखिया सीनी सोरेन, शंकर हेंब्रम, मंटू गोप, मधु सोरेन, सत्यनारायण टुडू, पूर्व जिला परिषद सदस्य सुदिप्तो दे, रघुनाथ हांसदा, तुराम हेंब्रम, मानिक मलिक, विशु हांसदा, लेचा माझी समेत काफी संख्या में ग्रामवासी व फ्लैट वासी स्थल पर पहुंच गये थे.

प्रशासनिक इंजीनियरों ने पूरा किया सर्वे, चक्रधरपुर डीआरएम से मांगी मदद

निरीक्षण के दौरान सांसद के निर्देश पर जिला प्रशासन की ओर से पहुंची इंजीनियरों की टीम ने पूरे क्षेत्र का तकनीकी सर्वे किया. इंजीनियरों के द्वारा जल्द ही सर्वे रिपोर्ट तैयार कर पूर्वी सिंहभूम के उपायुक्त को सौंप दी जाएगी, ताकि आगे की प्रशासनिक कार्रवाई शुरू हो सके. वहीं, रेलवे क्षेत्र से जुड़ी अड़चनों को दूर करने के लिए सांसद ने चक्रधरपुर रेल मंडल के डीआरएम से सीधे फोन पर वार्ता की. सांसद के पहल पर डीआरएम ने आश्वासन दिया कि जल निकासी के लिए रेलवे अपने स्तर से हरसंभव सहयोग प्रदान करेगा.

सर्वे से नहीं संतुष्ट करनडीह ग्रामसभा, धरातल पर काम शुरू करने की मांग

बुधवार को भले ही सांसद और प्रशासनिक इंजीनियरों ने मिलकर स्थिति का जायजा लिया और सर्वे पूरा किया, लेकिन करनडीह ग्रामसभा को जिला प्रशासन की इस कागजी कार्रवाई पर रत्ती भर भी भरोसा नहीं है. ग्रामसभा के सदस्यों का कहना है कि जब तक धरातल पर वास्तविक निर्माण कार्य शुरू नहीं होता, तब तक करनडीह रेलवे फाटक के समीप नाली जाम ही रहेगी और गंदे पानी का भराव यूं ही बना रहेगा. केवल सर्वे और मौखिक आश्वासनों से ग्रामीणों का गुस्सा शांत होने वाला नहीं है.

23 अगस्त को मेन रोड जाम पर अड़े ग्रामीण, सामूहिक वार्ता के बाद ही फैसला

मालूम हो कि मंगलवार को करनडीह ग्रामसभा और फ्लैटवासियों के संयुक्त प्रतिनिधिमंडल ने बीडीओ और सीओ से मुलाकात कर अविलंब समाधान की मांग की थी. ग्रामीणों ने दोटूक चेतावनी दी है कि यदि समस्या का तुरंत हल नहीं निकला, तो 23 अगस्त को करनडीह मेन रोड को जाम किया जाएगा. ग्रामसभा के लोगों का कहना है कि 23 अगस्त से पूर्व ग्रामसभा एक बार सामूहिक वार्ता की जाएगी और उसी के बाद आंदोलन स्थगित करने पर कोई अंतिम विचार होगा. फिलहाल केवल आश्वासनों के दम पर वे अपने पूर्व निर्धारित आंदोलन के निर्णय से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं.


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लेखक के बारे में

By दशमत सोरेन

दशमत सोरेन ने रांची विश्वविद्यालय से अंग्रेजी साहित्य में स्नातकोत्तर किया है. वे 29 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. उनकी विशेषज्ञता मुख्य रूप से झारखंड की आदिवासी-मूलवासी राजनीति, स्थानीय समुदायों की भाषा-संस्कृति और यहां के सामाजिक ताना-बाना है. वे वर्ष 2010 से प्रभात खबर के साथ एक ट्राइबल रिपोर्टर के रूप में काम कर रहे हैं.

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