जमशेदपुर: ग्रीन सिटी के नाम से पहचान रखने वाले शहर जमशेदपुर की हवा अब लगातार चिंता का कारण बनी हुई है. क्लीन एयर सर्वे में शहर की स्थिति खराब रही है और रैंकिंग के मामले में यह धनबाद और रांची से भी पीछे है. प्रदूषण नियंत्रण को लेकर टाटा स्टील, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और स्थानीय प्रशासन की ओर से लगातार दावे, बैठकें और अभियान चलाये जा रहे हैं, लेकिन शहर में वायु प्रदूषण का स्तर कम होने के बजाय बढ़ता दिखाई दे रहा है.
पिछले कुछ सप्ताह के आंकड़ों पर नजर डालें तो जमशेदपुर का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) लगातार खराब और बेहद खराब श्रेणी में रहा है. 7 सितंबर की शाम 6.01 बजे शहर का AQI 140 तक पहुंच गया था. वहीं, 8 सितंबर की सुबह 8.01 बजे AQI 120 दर्ज किया गया. जबकि AQI का मानक स्तर 50 माना जाता है.
पीएम-10 का स्तर मानक से काफी अधिक
प्रदूषण के आंकड़ों के मुताबिक, शहर में सल्फर डाइऑक्साइड का स्तर करीब 30.70 से 46.05 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर और नाइट्रोजन ऑक्साइड 36.34 से 55.14 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर के बीच रहा. वहीं, पीएम-10 का स्तर 86 से 175.33 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर और कुल सस्पेंडेड पार्टिकल्स 176 से 358 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर तक दर्ज किया गया.
प्रदूषण नियंत्रण पर्षद के अनुसार पीएम-10 के लिए 24 घंटे का निर्धारित मानक 100 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर है. नाइट्रोजन ऑक्साइड की निर्धारित सीमा 80 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर है. आंकड़ों के अनुसार नाइट्रोजन ऑक्साइड निर्धारित सीमा के भीतर रहा, लेकिन पीएम-10 कई मौकों पर मानक से काफी ऊपर पहुंचा. औद्योगिक क्षेत्र के केंद्र 382 में भी पीएम-10 की मात्रा 94.25 से 161.37 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर तक दर्ज की गयी.
AQI 120, फेफड़े और दिल के मरीजों को परेशानी
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मानक के मुताबिक 0 से 50 तक का AQI स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित माना जाता है. 51 से 100 तक की स्थिति में संवेदनशील लोगों को हल्की परेशानी हो सकती है. वहीं 101 से 200 तक AQI रहने पर फेफड़े और दिल के मरीजों को सांस लेने में परेशानी हो सकती है.
ऐसे में जमशेदपुर में लगातार 100 से ऊपर AQI रहना चिंता का विषय है. खासकर बारिश के मौसम में भी AQI में अपेक्षित सुधार नहीं होना शहर की हवा की स्थिति पर सवाल खड़ा करता है.
बिना जांच के बन रहा प्रदूषण सर्टिफिकेट
प्रदूषण नियंत्रण के सरकारी प्रयासों की जमीनी स्थिति पर भी सवाल उठ रहे हैं. प्रदूषण सर्टिफिकेट बनाने वाले कुछ PUC सेंटरों पर बिना वाहन की जांच किये ही सर्टिफिकेट जारी किये जाने की बात सामने आ रही है. बिष्टुपुर और गोलमुरी में प्रदूषण बोर्ड के सेंटर बंद हो चुके हैं.
औद्योगिक इकाइयों की मॉनिटरिंग को लेकर भी सवाल हैं. टाटा स्टील और उससे जुड़े इंटीग्रेटेड प्लांट में नियमों का पालन होने की बात कही जा रही है, लेकिन कई अन्य कंपनियों की गतिविधियों पर पर्याप्त निगरानी नहीं होने का आरोप है.
क्लीन एयर प्रोग्राम पर 80 करोड़ खर्च
जमशेदपुर अक्षेस को आदित्यपुर नगर निगम, मानगो नगर निगम, जुगसलाई नगर परिषद और जमशेदपुर अक्षेस की संयुक्त समिति के तहत क्लीन एयर प्रोग्राम की नोडल एजेंसी बनाया गया है. इसके तहत करीब 80 करोड़ रुपये खर्च किये गये हैं.
सड़कों की सफाई के लिए स्वीपिंग मशीन खरीदी गयी, लेकिन वह बेकार पड़ी है. शहर के 10 स्थानों पर फव्वारा लगाने की योजना भी थी, लेकिन यह योजना धरातल पर नहीं उतर सकी. अब तक एक भी फव्वारा नहीं लगाया गया. पेवर्स ब्लॉक के नाम पर भी करोड़ों रुपये खर्च किये गये, लेकिन इसके बावजूद शहर में प्रदूषण का स्तर कम नहीं हुआ.
प्रदूषण नियंत्रण पदाधिकारी, कोल्हान जीतेंद्र सिंह ने कहा कि क्लियर एयर प्रोग्राम के तहत प्रदूषण नियंत्रण के उपाय किये जा रहे हैं. नागरिक क्षेत्रों में उपाय करने की जिम्मेदारी नगर निकायों की है, जबकि औद्योगिक क्षेत्रों में लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है. इसे और बेहतर करने का प्रयास किया जा रहा है.
प्रदूषित हवा का स्वास्थ्य पर असर
शहर की प्रदूषित हवा का असर लोगों की सेहत पर भी पड़ रहा है. एमजीएम अस्पताल और टीएमएच की ओपीडी में सांस संबंधी मरीजों की संख्या में 25 प्रतिशत तक बढ़ोतरी दर्ज किये जाने की बात कही गयी है.
शहर के फिजिशियन डॉ एसके झा के अनुसार, हवा में पीएम 2.5 का स्तर बढ़ने से छोटे बच्चों, बुजुर्गों और अस्थमा के मरीजों को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है. सुबह की सैर पर निकलने वाले लोगों को भी गले में खराश और आंखों में जलन की शिकायत हो रही है.
एक तरफ प्रदूषण के आंकड़े लगातार चिंता बढ़ा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर प्रदूषण नियंत्रण को लेकर किये जा रहे दावों के बावजूद हवा की गुणवत्ता में अपेक्षित सुधार नहीं होना गंभीर सवाल खड़े करता है.
