जमशेदपुर: धालभूमगढ़ एयरपोर्ट निर्माण की दिशा में बड़ी प्रशासनिक पहल हुई है. झारखंड सरकार ने एयरपोर्ट प्रोजेक्ट से जुड़ी प्रमुख अड़चनों को दूर करते हुए केंद्र सरकार के नागरिक उड्डयन मंत्रालय और पर्यावरण मंत्रालय की ओर से पूछे गये सभी 19 सवालों के जवाब और जरूरी एनओसी केंद्र सरकार को सौंप दिये हैं. अब केंद्र सरकार और भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) को राज्य सरकार की ओर से भेजी गयी रिपोर्ट की समीक्षा करनी है. इसके बाद एयरपोर्ट प्रोजेक्ट के लिए अंतिम वित्तीय और प्रशासनिक स्वीकृति मिलने का रास्ता साफ हो सकता है.
इस मामले में पहले पीसीसीएफ की ओर से पूरी रिपोर्ट तैयार की गयी. रिपोर्ट का फाइनल ड्राफ्ट राज्य सरकार के वन विभाग के सचिव को भेजा गया था. अब इस रिपोर्ट को केंद्र सरकार के पास भेज दिया गया है. हालांकि, इस संबंध में राज्य सरकार की ओर से अभी आधिकारिक तौर पर कोई जानकारी जारी नहीं की गयी है.
19 बिंदुओं पर मांगा गया था जवाब
धालभूमगढ़ में द्वितीय विश्व युद्ध के समय की पुरानी हवाई पट्टी मौजूद है. इसे आधुनिक घरेलू हवाई अड्डे के रूप में विकसित करने की योजना तैयार की गयी थी. प्रोजेक्ट को लेकर पर्यावरण और वन भूमि से जुड़ी स्वीकृति, एलीफेंट कॉरिडोर यानी हाथी गलियारे पर प्रभाव, जमीन के स्वामित्व, वन्यजीव संरक्षण और रनवे की तकनीकी दिशा समेत कई मुद्दे सामने आये थे.
इन्हीं मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार ने राज्य के वन एवं पर्यावरण विभाग और स्थानीय प्रशासन से 19 विशिष्ट सवाल पूछे थे. राज्य सरकार ने अपनी रिपोर्ट में इन सभी सवालों का विस्तृत जवाब दिया है. रिपोर्ट में बताया गया है कि एएआइ को हस्तांतरित की जाने वाली वन और गैर-वन भूमि के सीमांकन की प्रक्रिया पूरी कर ली गयी है. वन भूमि डायवर्जन की प्रक्रिया को लेकर भी जानकारी दी गयी है.
राज्य सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि प्रस्तावित एयरपोर्ट प्रोजेक्ट से एलीफेंट कॉरिडोर को न्यूनतम नुकसान पहुंचेगा. केंद्रीय मानकों के अनुसार क्षतिपूरक वनीकरण और जरूरी सुरक्षा उपाय लागू किये जायेंगे. बिजली और पानी की निर्बाध आपूर्ति के साथ सुरक्षा मानकों को लेकर पूछे गये सवालों के जवाब में भी राज्य सरकार ने अपनी तैयारी की पुष्टि की है.
अब केंद्र की मंजूरी पर नजर
राज्य सरकार की रिपोर्ट में रनवे की लंबाई, एप्रोच रोड, बिजली और पानी की आपूर्ति को लेकर तैयारी की पुष्टि की गयी है. अब केंद्र सरकार रिपोर्ट की समीक्षा करने के बाद प्रोजेक्ट को अंतिम वित्तीय और प्रशासनिक स्वीकृति देगी. इसके बाद ही निर्माण कार्य शुरू होने की दिशा में आगे की प्रक्रिया बढ़ सकेगी.
धालभूमगढ़ एयरपोर्ट के निर्माण से कोल्हान प्रमंडल के जमशेदपुर, सरायकेला-खरसावां और पश्चिम सिंहभूम के साथ-साथ पड़ोसी राज्यों पश्चिम बंगाल और ओडिशा के सीमावर्ती क्षेत्रों को भी सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है.
जमशेदपुर देश के प्रमुख औद्योगिक शहरों में शामिल है. एयरपोर्ट शुरू होने से टाटा स्टील समेत क्षेत्र के एमएसएमइ सेक्टर और उद्यमियों को दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और बेंगलुरु जैसे प्रमुख महानगरों के लिए सीधी हवाई कनेक्टिविटी मिल सकेगी. इससे निवेश के नये अवसर खुलने की संभावना है.
अब कोल्हानवासियों की निगाहें केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय के फैसले पर टिकी हैं. केंद्र की अंतिम मंजूरी मिलने के बाद धालभूमगढ़ में एयरपोर्ट निर्माण का काम शुरू होने की दिशा में रास्ता साफ हो सकता है. एयरपोर्ट बनने से निर्माण के दौरान रोजगार के अवसर पैदा होंगे. वहीं, एयरपोर्ट के संचालन के बाद स्थानीय स्तर पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी मिलेंगे.
