जमशेदपुर: एमजीएम मेडिकल कॉलेज परिसर में अब डिलीवरी ब्वॉय सीधे अंदर नहीं आ सकेंगे. कॉलेज प्रबंधन ने सुरक्षा और अनुशासन को ध्यान में रखते हुए नया नियम लागू किया है. इसके तहत ऑनलाइन फूड डिलीवरी कंपनियों के डिलीवरी एजेंटों के कॉलेज परिसर, एकेडमिक ब्लॉक और हॉस्टल में प्रवेश पर पूरी तरह रोक लगा दी गयी है. अब डिलीवरी लेने के लिए छात्र-छात्राओं और रेजिडेंट डॉक्टरों को खुद कैथ लैब के पास बने गेट तक जाना होगा.
मुख्य गेट पर फोन करेंगे डिलीवरी एजेंट
मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ संजय कुमार ने बताया कि छात्र-छात्राएं और रेजिडेंट डॉक्टर अब अपना फूड पैकेट, दवाएं या ऑनलाइन शॉपिंग का पार्सल कैथ लैब के पास बने गेट से ले सकेंगे. डिलीवरी एजेंट मुख्य गेट पर पहुंचकर संबंधित व्यक्ति को फोन करेंगे. इसके बाद सामान की डिलीवरी गेट पर ही की जायेगी.
गेट पर तैनात सुरक्षाकर्मियों को भी सख्त निर्देश दिया गया है कि किसी भी अनधिकृत डिलीवरी वाहन या डिलीवरी एजेंट को बैरिकेडिंग पार कर अंदर जाने की अनुमति नहीं दी जाये.
कॉलेज में हुई घटनाओं के बाद लिया गया फैसला
कॉलेज परिसर में पिछले दिनों छात्रों और डिलीवरी ब्वॉय के बीच मारपीट की घटना हुई थी. इसके बाद कॉलेज प्रबंधन ने सुरक्षा व्यवस्था और पूरे मामले की समीक्षा की. इसी के बाद डिलीवरी एजेंटों के सीधे प्रवेश पर रोक लगाने का निर्णय लिया गया.
क्या था मामला?
एमजीएम मेडिकल कॉलेज के ब्वॉयज हॉस्टल से लैपटॉप चोरी के मामले में पुलिस ने मानगो निवासी पवन कुमार (30) को गिरफ्तार किया था. उसकी निशानदेही पर चोरी का डेल लैपटॉप बरामद हुआ.
पुलिस के अनुसार, पवन पहले डिलीवरी ब्वॉय था. 28 मार्च की रात डिलीवरी देने हॉस्टल गया था. लौटते समय खुले कमरे में रखा लैपटॉप देखकर उसने उसे चोरी कर लिया और घर की अलमारी में छिपा दिया.
लैपटॉप चोरी और कॉलेज में डिलीवरी ब्वॉय से जुड़े विवाद के बाद सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की गयी. इसके बाद डिलीवरी एजेंटों के हॉस्टल और कॉलेज परिसर में प्रवेश पर रोक लगाने का फैसला लिया गया.
