वरीय संवाददाता, जमशेदपुर
झारखंड की राजनीति में पूर्व मंत्री बन्ना गुप्ता और विधायक सरयू राय के बीच पुरानी अदावत है. उनका 36 साल का रिश्ता जगजाहिर है. दोनों नेताओं के बीच जुबानी जंग अक्सर सुर्खियों में रहती है. अब पुरानी रार में नया वार हुआ है. मानगो नगर निगम की मेयर व पूर्व मंत्री बन्ना गुप्ता की पत्नी सुधा गुप्ता पर विधायक के कथित अशोभनीय और आपत्तिजनक टिप्पणी पर लौहनगरी का सियासी पारा एक बार फिर चढ़ गया है . मेयर पत्नी के समर्थन में अब पूर्व मंत्री बन्ना गुप्ता की पार्टी खुलकर मैदान में उतर गयी है. दोनों के समर्थकों के बीच घमासान मच गया है.
विधायक सरयू राय को सद्बुद्धि देने की कामना की
मंगलवार को कदमा उलियान स्थित नेताजी सुभाष चंद्र बोस पार्क के पास कांग्रेस पार्टी ने विशेष प्रार्थना सभा आयोजित कर भगवान से विधायक सरयू राय को सद्बुद्धि देने की कामना की, ताकि वे सार्वजनिक जीवन में अपनी भाषा और गरिमा का पूरा ख्याल रखें. सभा के अंत में सभी ने शांतिपूर्ण तरीके से विरोध जताते हुए महिलाओं के सम्मान की रक्षा करने का कड़ा संकल्प लिया और जमकर विधायक राय पर भड़ास निकाली. दिलचस्प है कि इस कार्यक्रम में मेयर और उनके पति सामने नजर नहीं आये, लेकिन पार्टी सूत्रों की मानें तो पर्दे के पीछे से मॉनिटरिंग की जा रही थी.
कार्यक्रम में शिल्पी चक्रवर्ती, गौरी देवी, मारिया जोसेफ, पिंकी देवी, कंचन देवी, कल्पना सेन, बबुआ झा, ओम प्रकाश सिंह, प्रभात ठाकुर, संजय तिवारी, प्रदीप शर्मा, लखी गौड़, विजेंद्र तिवारी, प्रताप यादव, अभिषेक मोहंती, दीपक यादव, अजय गुप्ता, कवि चंद रजक, गणेश साहू, संतोष जैन, भरत गढ़वाल, राजेश कालिंदी, सूरज गौड़, अभिनंदन सरकार आदि उपस्थित थे.
महिलाओं के खिलाफ अमर्यादित भाषा बर्दाश्त नहीं, वाणी पर संयम रखें
प्रार्थना सभा में मौजूद कांग्रेस नेताओं और वक्ताओं ने साफ शब्दों में कहा कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन किसी महिला जनप्रतिनिधि के खिलाफ अमर्यादित भाषा बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जायेगा. वक्ताओं ने कहा कि जनप्रतिनिधियों को हमेशा अपनी वाणी पर संयम रखना चाहिए. राजनीतिक विरोध भले ही कितना भी पुराना या गहरा क्यों न हो, लेकिन इस तरह की टिप्पणियां समाज और लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं हैं.
क्या कहा था विधायक ने?
विधायक सरयू राय ने मेयर सुधा गुप्ता को मिलने वाले सरकारी मानदेय पर टिप्पणी करते हुए उनकी दैनिक जीवनशैली का जिक्र किया था. उन्होंने कहा "कौन-सा वेतन मिलता है. जितना मानदेय उन्हें मिलता है, उतना तो शायद वह रोज अपने ऊपर खर्च करती होंगी. नहाना-धोना, साफ-सुथरा और क्लीन रहना. अगर वह मानदेय नहीं लेना चाहती हैं, तो नहीं लें... यह अच्छी बात है.
