अधिवक्ता अमर तिवारी की शिकायत पर पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के मंत्री ने दिये जांच के निर्देश
Jamshedpur News :
जुगसलाई वाटर प्लांट में 22 लाख रुपये की लागत से हुए उपकरणों की खरीद और स्थापना में बड़े पैमाने पर अनियमितता के आरोप लगे हैं. टेंडर के नाम पर घटिया सामग्री लगाने और सरकारी राशि की बंदरबांट के आरोपों के बाद पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के मंत्री ने उपायुक्त को जांच के निर्देश दिये हैं. मंत्री से की गयी शिकायत में कहा गया है कि वर्ष 2024 में इसका टेंडर हुआ था. मैकेनिकल डिवीजन जमशेदपुर ने रांची के अन्ना ट्रेडर्स को कार्य आवंटित किया था. आरोप है कि ठेकेदार के बजाय विभागीय अधिकारियों ने स्वयं कार्य निष्पादित कर कमीशन का खेल रचा. प्लांट में 2015 मॉडल के पुराने और घटिया स्टार्टर लगाये गये, जो अब तक पांच बार जल चुके हैं. इसके कारण जलापूर्ति बाधित होती रही. विभाग के अधिकारियों पर आरोप है कि वे ठेकेदार को बचाने के लिए खुद ही मरम्मत कार्य कर रहे हैं, ताकि पुराने उपकरणों को नया दिखाकर भुगतान कराया जा सके. इस मामले में कार्यपालक अभियंता सुनीता सामंत, अभियंता गहलोत और रांची के अधीक्षण अभियंता शंकर दास की भूमिका संदिग्ध बतायी जा रही है. पूर्व में उपायुक्त द्वारा गठित जांच टीम के सदस्य संदीप पासवान और दीपक सहाय ने तीन महीने बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं की. विभाग द्वारा भेजी गयी अन्य जांच टीमों की रिपोर्ट भी आज तक सार्वजनिक नहीं हुई है.मामले के शिकायतकर्ता अधिवक्ता अमर तिवारी ने कहा कि विभाग सिर्फ खानापूर्ति कर रहा है. जब तक अधीक्षण अभियंता शंकर दास, कार्यपालक अभियंता सुनीता सामंत और संबंधित इंजीनियरों का तबादला नहीं होगा, निष्पक्ष जांच संभव नहीं है. हाल ही में 15 साल पुरानी टंकी के धरासायी होने के बाद भी अधिकारी सबक नहीं ले रहे हैं.
