जमशेदपुर : आतंकी संगठन लश्कर ए तैयबा का सदस्य मानगो आजादनगर रोड नंबर 12 ए निवासी मौलाना कलीमुद्दीन को लेकर झारखंड एटीएस की जांच काफी धीमी रफ्तार में चल रही है. इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि गिरफ्तारी के 90 दिनों के बाद भी मामले की अनुसंधान कर रही एटीएस ने कोर्ट में चार्जशीट दाखिल नहीं की है. 23 दिसंबर को इस मामले में सीजेएम की कोर्ट में सुनवाई होनी थी. उक्त सुनवाई में भी मामले के अनुसंधानकर्ता पेश नहीं हुए.
90 दिनों बाद भी चार्जशीट नहीं कोर्ट से मिल सकती है जमानत
जमशेदपुर : आतंकी संगठन लश्कर ए तैयबा का सदस्य मानगो आजादनगर रोड नंबर 12 ए निवासी मौलाना कलीमुद्दीन को लेकर झारखंड एटीएस की जांच काफी धीमी रफ्तार में चल रही है. इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि गिरफ्तारी के 90 दिनों के बाद भी मामले की अनुसंधान कर रही एटीएस ने कोर्ट […]

जानकारों की मानें, तो गिरफ्तारी के 90 दिनों के अंदर चार्जशीट दाखिल नहीं करने का फायदा मौलाना कलीमुद्दीन को मिल सकता है. अब वह अधिवक्ता के माध्यम से कोर्ट में जमानत की अर्जी दाखिल कर सकता है. एटीएस द्वारा चार्जशीट दाखिल नहीं करने पर मौलाना कलीमुद्दीन को कोर्ट जमानत भी दे सकती है और ऐसे में वह जेल से रिहा हो सकता है.
अभी वह घाघीडीह जेल में बंद है. मालूम हो कि 21 सितंबर की रात झारखंड एटीएस की टीम ने मौलाना कलीमुद्दीन को टाटानगर स्टेशन के पास से गिरफ्तार किया था. उसने आतंकी संगठन के सदस्यों को अपने घर में पनाह दी थी. उसे संगठन को मजबूत करने की जिम्मेदारी दी गयी थी. इसी मामले में वह बांग्लादेश, सऊदी अरब समेत अन्य देश भी गया था.
उसका संबंध आतंकी संगठन से जुड़े मो कटकी, मो जीशान, मो अर्शियान, बेंगलुरु के मो युसुफ, अबु सुफियान के अलावा अन्य से है. मौलाना मंसूर उर्फ कटकी ने ही मो युसूफ से उसकी मुलाकात करवायी थी. वर्ष 2012 में जब कटकी जमशेदपुर आया था, तो मौलाना कलीमुद्दीन के घर पर ही मो युसुफ और साकिब से मुलाकात की थी और घटना को अंजाम देने को लेकर योजना बनायी थी. मो युसुफ का संबंध सबिल से भी था.
मो सबिल लंदन एयरपोर्ट पर बम विस्फोट में मारे गये डॉ काफिल का छोटा भाई है. इधर, मौलाना कलीमुद्दीन के मामले की कोर्ट में पैरवी कर रहे अधिवक्ता अजीत सिंह ने बताया कि एटीएस द्वारा अबतक चार्जशीट दाखिल नहीं किया गया है. अब वह कलीमुद्दीन की जमानत के लिए कोर्ट में पैरवी करेंगे.