जमशेदपुर : सरस का शव पहुंचते ही गमगीन हुई सुवर्णरखा कॉलोनी

बहन बोली, उठो न बाबू, सोया क्यों है, देखो मां बुला रही है मझले भाई गाेविंद की भी 15 साल पहले हो चुकी थी मौत जमशेदपुर : बाबू उठो न सोया क्यों है, देखो मां बुला रही है. चीख चीत्कार के बीच बेसुध सरस की बहन सीखा बार-बार उसे उठने के लिए बोल रही थी. […]

बहन बोली, उठो न बाबू, सोया क्यों है, देखो मां बुला रही है

मझले भाई गाेविंद की भी 15 साल पहले हो चुकी थी मौत
जमशेदपुर : बाबू उठो न सोया क्यों है, देखो मां बुला रही है. चीख चीत्कार के बीच बेसुध सरस की बहन सीखा बार-बार उसे उठने के लिए बोल रही थी. सरस के सड़क दुर्घटना में मरने की जानकारी मां विमला देवी को नहीं थी.
घर के बाहर हो रही भीड़ और घर में आ रहे लोगों को देखकर वह चिंतित थी. वह बार-बार पूछ रही थी कि बाबू कब आयेगा़ डिमना रोड स्थित सुवर्णरेखा प्रोजक्ट कॉलोनी में 12.40 बजे शव पहुंचते ही सभी लोग दहाड़ मारकर रोने लगे.
पिता गुरु दास मांझी घर के बाहर खड़े थे, शव को देख कर पिता अचेत हो गये. जिस मां को बेटे के आने का इंतजार था, उसके सामने उसका शव पड़ा था. मां घर में आए लोगाें से पूछने लगी कि मेरे बाबू को क्या हुआ है उसे ऐसे क्यों रखा है उसे उठाओ.
मां को जब बताया गया कि अब सरस नहीं आयेगा, वह सभी को छोड़कर जा चुका है़ मां विमला एक ही रट लगा रही थी कि उसे क्यों नहीं पहले क्याें नहीं बताया. मां अपने बेटे को देखे या घटना कैसे हुई ये पूछे वह बेसुध हो चुकी थी उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था. घर से शव यात्रा के निकलने के बाद माता-पिता एक-दूसरे से लिपट कर रोने लगे. यह काफी हृदय विदारक दृश्य था.
खाली पड़ा था बिस्तर, मां ने कहा, यहीं सोता था मेरा बाबू
क्वार्टर में प्रवेश करते साथ पहले ही कमरे में सरस सोया करता था. पिता सेवानिवृत्त हो चुके हैं, लेकिन क्वार्टर की चाबी अभी हैंडओवर नहीं की है. कमरे के बिस्तर को देख कर मां ने कहा यही तो उसका बाबू सोता था. कांदरबेड़ा में अपना मकान बन कर तैयार हो गया है सरस हाल में वहीं रहना शुरू किया था़

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