जमशेदपुर : जमशेदपुर के उच्च शिक्षण संस्थानों में अराजकता का आलम यह है कि औसतन हर दिन किसी न किसी कॉलेज में मारपीट से लेकर हंगामे की स्थिति पैदा हो रही है. कॉलेजों के प्राचार्य व शिक्षक ऐसे मामलों में आरोपियों के खिलाफ शिकायत तक दर्ज नहीं कराते. पुलिस के आला अधिकारी शिकायत नहीं होने की बात कहकर कार्रवाई से पल्ला झाड़ लेते है.
पिछले माह 10 अगस्त को साकची स्थित ग्रेजुएट कॉलेज के प्राचार्य कक्ष में दो छात्र संगठनों के बीच मारपीट हुई. प्राचार्य कक्ष में भारी तोड़फोड़ हुई. पुलिस ने मौके पर कुछ छात्र नेताओं को हिरासत में लिया. इन सबके बावजूद किसी भी कथित छात्र नेता के खिलाफ शिकायत नहीं की गयी. कॉलेज की प्रभारी प्राचार्य डॉ. सत्यरूपा श्रीवास्तव ने कॉलेज में हुए तोड़फोड़ के मामले की शिकायत सिटी एसपी के समक्ष की. पुलिस की ओर से शिकायत का इंतजार होता रहा.
थाने से 100 कदम की दूरी पर हुई घटना
शिक्षण संस्थानों का माहौल खराब करने के लिए सोशल नेटवर्किंग साइट का जमकर इस्तेमाल हो रहा है. वैचारिक विरोध वाट्सएप व फेसबुक के जरिये व्यक्तिगत नफरत में तब्दील हो रही है. कुछ लोग बेहद शातिर तरीके से ऐसे विवादों को हवा दे रहे हैं. जेएनयू के विवाद में जमशेदपुर में छात्र एक-दूसरे के खून के प्यासे हो रहे हैं. पुलिस प्रशासन ऐसे गंभीर मामलों को भी हल्के में ले रहा. बुधवार को दोनों पक्ष पुलिस जवानों की मौजूदगी में एक-दूसरे से भिड़ गये. थाने से 100 कदम के अंदर बार-बार मारपीट व तोड़फोड़ जैसी घटनाएं कानून-व्यवस्था पर सवाल उठा रही हैं.
