बैठक में उपायुक्त अमित कुमार ने सूचना आयुक्त का किया स्वागत

जमशेदपुर : राज्य के सूचना आयुक्त आदित्य स्वरूप ने बताया कि सूचना के अधिकार अधिनियम में दंड का भी प्रावधान है. आवेदक को सूचना नहीं देने के कारण यदि आर्थिक नुकसान होता है तो अधिनियम के तहत आवेदक को क्षतिपूर्ति देने का भी प्रावधान है जो असीमित है. राज्य सूचना आयुक्त आदित्य स्वरूप की अध्यक्षता […]

जमशेदपुर : राज्य के सूचना आयुक्त आदित्य स्वरूप ने बताया कि सूचना के अधिकार अधिनियम में दंड का भी प्रावधान है.

आवेदक को सूचना नहीं देने के कारण यदि आर्थिक नुकसान होता है तो अधिनियम के तहत आवेदक को क्षतिपूर्ति देने का भी प्रावधान है जो असीमित है. राज्य सूचना आयुक्त आदित्य स्वरूप की अध्यक्षता में शनिवार को जिला मुख्यालय सभागार में सूचना का अधिकार अधिनियम पर कार्यशाला सह प्रशिक्षण का आयोजन किया गया.
उपायुक्त अमित कुमार ने सूचना आयुक्त का स्वागत किया. सूचना आयुक्त ने जन सूचना पदाधिकारी एवं प्रथम अपीलीय पदाधिकारी को सूचना के अधिकार अधिनियम की विस्तृत जानकारी दी.
सूचना आयुक्त ने पदाधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि नागरिक केंद्रित सरकार की अवधारणा के आधार पर सूचना के अधिकार अधिनियम को सरकार ने बनाया, जिससे देश के आम नागरिक जनहित से जुड़ी सूचनाएं सरल व सहजता से प्राप्त कर सके. कार्यशाला में डीडीसी वी माहेश्वरी, एडीएम सुबोध कुमार, एडीसी एसके सिन्हा, एनइपी की निदेशक रंजना मिश्रा, डीआरडीए की निदेशक उमा महतो समेत सभी सरकारी विभाग के जन सूचना पदाधिकारी व प्रथम अपीलीय पदाधिकारी मौजूद थे.
जन सूचना पदाधिकारी पर 250 से 25 हजार रुपये तक दंड के साथ अनुशासनात्मक कार्रवाई का भी प्रावधान
राज्य के सूचना आयुक्त आदित्य स्वरूप ने कहा कि लोकतंत्र की तरह सूचना के अधिकार अधिनियम में अपील की व्यवस्था है. 2002 में फ्रीडम अॉफ इनफॉरमेशन अधिनियम सरकार द्वारा लाया गया था, लेकिन उसमें कई खामियां थी. सूचना के अधिकार अधिनियम का सरलीकरण किया गया, ताकि आम आदमी को सूचना प्राप्त करने में कोई परेशानी न हो.
उन्होंने कहा कि सूचना के अधिकार अधिनियम में दंड का प्रावधान है, जिसके तहत आयोग 250 रुपये से 25 हजार रुपये तक दंड जन सूचना पदाधिकारी पर लगा सकता है, जो उसके वेतन से कटेगा. साथ ही अनुशासनात्मक कार्रवाई का प्रावधान है अौर आयोग अनुशासनात्मक कार्रवाई भी जन सूचना पदाधिकारी के विरुद्ध कर सकता है. सूचना आयुक्त ने पदाधिकारियों को बताया कि वैसी सूचना जिससे राष्ट्र की अखंडता, सरकार की गोपनीयता भंग हो वैसी सूचना देना निषेध है. राज्य सूचना आयुक्त ने पदाधिकारियों के जिज्ञासा का भी निराकरण किया.

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