कुचाई लूट व अपहरण के चश्मदीद नरेंद्र और सुनील ने बताया पूरा घटनाक्रम
जमशेदपुर/सरायकेला : कुचाई के सांकोडीह में बीते गुरुवार को रथ मेला से अपहृत रोहित व भरत का शव रविवार को रेगाडीह पहाड़ी से बरामद किया गया. घटना के चश्मदीद नरेंद्र गुप्ता और सुनील साहू ने बताया कि सात अपराधियों ने लूटपाट व मारपीट की. इस दौरान भरत ने अपराधियों से डंडा छीन लिया. वहीं अपराधियों से भिड़ गया. इसके बाद अपराधियों ने जबरन चारों को अपने साथ ले गये. वहीं रोहित स्थानीय भाषा में अपराधियों से उलझ गया.
रोहित नशे में था. स्थानीय भाषा में क्या कह रहा था, वह समझ नहीं पाया. दोनों ने बताया कि स्टूडियो में किसी महिला से अभद्र व्यवहार नहीं किया गया था. वहीं मेले में किसी तरह का विवाद भी नहीं हुआ था. अपराधी रास्ते भर उनके साथ मारपीट करते रहे. रोहित व भरत से कुछ दूर ले जाकर अधिक मारपीट की गयी. मारपीट में छह लोग शामिल थे. इस दौरान एक अपराधी ने कहा कि तुम दोनों (नरेंद्र व सुनील) को रास्ता बता देते हैं भाग जाओ. दहशत में हमलोग वहां से भाग गये.
छह लोगों ने की दोनों की हत्या
बागबेड़ा नागाडीह निवासी रोहित हांसदा उर्फ संजय हांसदा और धनबाद के भरत साहू की हत्या छह लोगों ने की. हालांकि सांकोडीह में लूटपाट के दौरान सात लोग शामिल थे. एक अपराधी मारपीट में शामिल नहीं था. उसने उन लोगों को आगे का रास्ता बताया था. नरेंद्र गुप्ता बिरसानगर निवासी है. उसका अपना घर है. वह मूल रूप से नालंदा के हाड़ी बिगहा के रहनेवाला है.
हमलावर को चेहरे से पहचान लूंगा, दो ने चेहरे पर रूमाल बांधा था : नरेंद्र ने बताया कि अगर हमलावर सामने आये, तो वह चेहरे से उन्हें पहचान लेगा. उनका नाम व पता नहीं जानता है. नरेंद्र गुप्ता अब भी दहशत में हैं. घटना की याद आते ही सहम जाता है. उसने बताया कि रात करीब 10 बजे स्टूडियो में चार लोग सोये थे. तभी सात लोग आ गये. इनकी उम्र 20-35 साल के बीच थी. दो ने रूमाल से चेहरा ढंक रखा था. उनके हाथ में डंडा व अन्य सामान थे. आते ही पैसा मांगने लगे. हमारे पास 390 रुपये थे. हमने दे दिये.
मेरा मोबाइल छीन लिया. इसी तरह अन्य लोगों से पैसे व मोबाइल ले लिए. कैमरा व लैपटॉप ले लिया. इसके बाद स्टूडियो में रखा बक्शा को तोड़कर छह हजार रुपये व अन्य सामान निकाल लिया. रात में एक गांव में घर खुलवाकर रास्ता पूछा : नरेंद्र ने बताया कि रास्ते में मारपीट के दौरान एक अपराधी ने हम दोनों (नरेंद्र व सुनील) को कहा, जंगल पार कर जाओ. एक किलोमीटर दूर गागुडीह नामक जगह मिलेगा. वहां से बड़ाबांबो निकल जाना. वहां ट्रेन मिल जायेगी. घायल अवस्था में हम भागने लगे. दहशत में थे कि रात में कहां जायेंगे. कहीं रोहित व भरत की हत्या न हो जाये. इसके लिए हम भागते-भागे दुराजपुर (संभवत: यही गांव था) पहुंचे. देर रात किसी का घर खटखटाने में डर लग रहा था. चोर समझ हमारे साथ अनहोनी न हो जाये. डरते-डरते एक घर खुलवाया. एक बुजुर्ग बाहर निकले. उनसे कहा :
चाचा हम संकट में हैं. किसी तरह खरसावां थाना को फोन कर दीजिए. उनसे मांग कर खैनी खायी. वहां से फोन नहीं हो सका. उनके बेटे ने हमें अागे जाने का रास्ता बता दिया.
सिर्फ रोहित ही जनता था स्थानीय भाषा : सुनील ने कहा कि वह दो जुलाई को मेला में पहुंचा था. चार-पांच जुलाई को मेला था. उसने कहा कि वे लोग स्थानीय लोगों को जानते तक नहीं. ना ही वहां की भाषा पूरी तरह से समझ रहे थे. रोहित के रिश्तेदार कुचाई में रहते हैं. वह स्थानीय भाषा जानता था. इससे उसे स्टूडियो में सहूलियत हो रही थी. रोहित के पिता शुरू साहू गांव में रहते हैं.
एक-एक पल भारी लग रहा था, किसी तरह साथियों की जान बचाना चाहते थे
रात में ग्रामीण के बताये रास्ते पर चलते हुए बड़ाबांबो स्टेशन पहुंचा. वहां एक चाय वाला मिला. मेरे पास पैसे नहीं थे. इस वजह से चाय नहीं पी. उससे कहा कि मुझे थाना में फोन करना है. चायवाला ने कहा कि स्टेशन पर जाकर फोन कर लो. स्टेशन कार्यालय का दरवाजा बंद था. हमने जोर-जोर से दरवाजा पीटा, लेकिन दरवाजा नहीं खुला. हम निराश हो चुके थे. एक-एक पल भारी लग रहा था. निराश होकर लौट रहे थे, तभी एक मोटा आदमी मिला. उससे कहा कि हम संकट में हैं. खरसावां थाना को फोन कर दीजिए. हमारे दो साथियों को अपराधियों ने पकड़ रखा है. पता नहीं किस हाल में होगा. उस व्यक्ति ने कहा कि चलो हम फोन करवाते हैं. इसके बाद फिर रेलवे कार्यालय ले गये. दरवाजा पीट कर खुलवाया. घटना की सूचना खरसावां थाना को देने को कहा. हालांकि उन लोगों ने बताया कि घटना कुचाई थाना क्षेत्र की है. हमने कहा – खरसावां थाना को सूचना मिल जाेयगी, तो वे लोग कुचाई थाना को सूचित कर देंगे. हम किसी तरह अपने दोनों साथी की जान बचाना चाह रहे थे. हमें लगा रहा था कि यदि जल्दी पुलिस वहां पहुंच जायेगी, तो दोनों की जान बच सकती है. थाना को फोन कर बाहर निकला, तो मोटा आदमी ने हमें चाय मंगवा कर दी. दो घूंट चाय पीया था कि गोमो पैसेंजर आ गयी. उस पर चढ़कर राजखरसावां आ गया. वहां से मेला स्थल पर पहुंचा. वहां रोहित और भरत का पता नहीं चला.
