जबरन जमीन अधिग्रहण के विरोध में 31 जुलाई को कोल्हान बंद का आह्वान

सरायकेला के तितिरबिला चौक में शुक्रवार की शाम को रैयतीदार व आदिवासी सामाजिक संगठनों ने डीसी, एसडीओ, भूअर्जन पदाधिकारी, पथ निर्माण विभाग के पदाधिकारी, सरायकेला थाना प्रभारी व सरायकेला अंचलाधिकारी का पुतला दहन किया गया.

जमशेदपुर: सरायकेला के तितिरबिला चौक में शुक्रवार की शाम को रैयतीदार व आदिवासी सामाजिक संगठनों ने डीसी, एसडीओ, भूअर्जन पदाधिकारी, पथ निर्माण विभाग के पदाधिकारी, सरायकेला थाना प्रभारी व सरायकेला अंचलाधिकारी का पुतला दहन किया गया. तितिरबिला मौजा के हातु मुंडा महेंद्र हेंब्रम के नेतृत्व में सरकारी पदाधिकारियों का पुतला दहन किया. हातु मुंडा महेंद्र हेंब्रम ने कहा कि सरकारी पदाधिकारी संविधान के सारे नियम व कानून को ताक में रखकर अपने निजी स्वार्थ के लिए काम कर रहे हैं. गरीब रैयती को डरा-धमका जबरन उनकी जमीन को अधिग्रहण कर रहे हैं. जबकि जमीन अधिग्रहण से पूर्व जमीन को अधिग्रहण करने की सारी प्रक्रिया को पूरा करना है. सारी प्रक्रिया को पूरा करने के बाद नियमत: जमीन को अधिग्रहण करना है. लेकिन सरायकेला-खरसावां जिले के पदाधिकारियों को संविधान व नियम कानून से कोई मतलब नहीं है. वे अपने बनाये नियम-कानून से चलते हैं. यदि वे संविधान व नियम कानून को मानते तो रैयती परिवार के साथ उनके गांव में ग्रामसभा करते और उनका सहमति लेते. रैयतदारों को किसी बिंदु पर कोई आपत्ति होती तो सरकारी पदाधिकारी उसके कारणों को जानकार समस्या को दूर करते. लेकिन यहां ना तो रैयतदारों से सहमति ली गयी है. ना ही उनके साथ मुआवजा आदि को लेकर कोई वार्ता ही हुई है.

खेतिहर जमीन को जबरन अधिग्रहण किया जा रहा
तितिरबिला मौजा के हातु मुंडा महेंद्र हेंब्रम ने कहा कि पदाधिकारी सरकारी काम है बोलकर ग्रामीणों के खेतिहर जमीन को जबरन जेसीबी से समतलीकरण कर सड़क बना रहे हैं. यह केवल तितिरबिला का ही मामला नहीं है. बल्कि समूचे कोल्हान में यही स्थिति है. इसलिए तितिरबिला समेत पूरे कोल्हान के आदिवासी सामाजिक संगठन ने एकजुट होकर गलत तरीके से जबरन रैयती जमीन को अधिग्रहण करने के विरोध में 31 जुलाई को कोल्हान बंद का आह्वान किया गया है. इस दिन कोल्हान के तीनों जिले में आदिवासी सामाजिक संगठन के लोग सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करेंगे और उनके साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ विरोध करेंगे.

नियम व प्रावधान के तहत ही जमीन का हो अधिग्रहण
गांव-देहात के लोग अशिक्षित व गरीब हैं. सरकारी पदाधिकारी उनकी अशिक्षा व गरीबी का फायदा उठा रहे हैं. रैयतदार को उनकी रैयती जमीन के बदले मिलने वाली मुआवजा समेत अन्य सुविधाओं के बारे में नहीं बता रहे हैं. अधिसूचना जारी करने के बाद सरकारी पदाधिकारी सीधे उनके खेतों में बुलडोजर लेकर पहुंच जा रहे हैं. जबकि अधिसूचना जारी करने के बाद से लेकर मुआवजा देने के बीच कई प्रक्रिया है. भू-अर्जन पदाधिकारी ने गरीब आदिवासियों के साथ उनके गांव में जाकर अधिग्रहण करने के संबंध में कभी वार्ता नहीं किया. ना ही उनकी सहमति लेने का प्रयास किया. रैयतदारों को अभी तक नहीं मालूम है कि यदि सरकार द्वारा सड़क निर्माण के लिए उनका जमीन को लिया जाता है तो उन्हें किस आधार पर कितना मुआवजा मिलना है. उन्होंने कहा कि गांव के ग्रामीणों का जीविकोपार्जन का मुख्य श्रोत कृषि ही है. उसी से उनके परिवार का गुजर बसर हाेता है. यदि सरकार की ओर से उन्हें समुचित लाभ दिये बिना ही रैयती जमीन से बेदखल कर दिया जायेगा तो उनका परिवार भूखे मर जायेगा. लेकिन सरकारी पदाधिकारी को तो अपने पद और पावर का रौब दिखाना है और गरीब अनपढ़ लोगों पर अपने पावर का इस्तेमाल करना है. गरीब आदिवासी विकास विरोधी बिलकुल नहीं हैं. लेकिन कोई भी बिना उचित मुआवजा दिये उनके जमीन पर बुलडोजर चलायेगा तो वह भला कब तक चुप बैठा रहेगा. उन्होंने कहा कि 31 जुलाई को कोल्हान बंद का आह्वान किया गया है. इस बंद के माध्यम से सरकार तक अपनी बातों को पहुंचाने का काम किया जायेगा. जबरन रैयती जमीन का अधिग्रहण बिलकुल स्वीकार नहीं है. देश संविधान से चल रहा है. संविधान में निहित नियम व प्रावधान के तहत ही जमीन को अधिग्रहण किया जाये. उनके रैयतदार को वर्तमान बाजार मूल्य से मुआवजा समेत अन्य सुविधा दिया जाये.

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Author: Dashmat Soren

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