भाषा में शब्द, दर्शन व वैज्ञानिकता एक साथ चलती है : प्रो सरोज शर्मा

विभावि में तीन दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन

हजारीबाग. विभावि के स्वामी विवेकानंद सभागार में आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन शनिवार को हुआ. अध्यक्षता कुलपति प्रो चंद्र भूषण शर्मा ने की. मुख्य अतिथि प्रो सरोज शर्मा ने कहा कि भाषा में शब्द, दर्शन और वैज्ञानिकता एक साथ चलती है. भारत में संस्कृत निष्ठ भाषा, दक्षिण की भाषा और जनजातीय भाषाओं को लेकर भारतीय भाषा परंपरा और ज्ञान परंपरा को समझा जा सकता है. प्रो सरोज राष्ट्रीय मुक्त विवि शिक्षा संस्थान की पूर्व अध्यक्ष रही हैं. भाषा और अध्यात्म के अंतर को बताते हुए उन्होंने कहा कि भाषा में शब्द, शब्दों में नाद और नाद में ब्रह्म होते हैं. मौन की भी अपनी भाषा होती है. प्रो सरोज ने बताया कि भाषा को लेकर जब भी विवाद होता है, तो उसके पीछे राजनीति होती है. संचालन डॉ अरुण कुमार मिश्रा व धन्यवाद ज्ञापन हिंदी विभाग के डॉ सुनील कुमार दुबे ने किया. शिक्षा शास्त्र विभाग की डॉ विनीता बांकीरा एवं डॉ भारती सिंह के निर्देशन में झूमर नृत्य प्रस्तुत किया गया. संगोष्ठी में कुल 152 आलेख समर्पित किये गये : कुलपति प्रो चंद्र भूषण शर्मा ने केंद्रीय भारतीय भाषा संस्थान के प्रति आभार व्यक्त किया. चंदन श्रीवास्तव ने बताया कि लोकभाषा, मातृभाषा एवं जनजातीय भाषाओं को संवर्धित करने का कार्य चल रहा है. सचिव डॉ विनोद रंजन ने तीन दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया. संगोष्ठी में कुल 152 आलेख समर्पित किये गये. विवि के संगोष्ठी संयोजक प्रो मिथिलेश कुमार सिंह ने आभार व्यक्त किया.

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By Sunil prasad

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