बड़कागांव. यक्ष्मा उन्मूलन को लेकर 100 दिनों के विशेष कार्यक्रम के तहत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में बैठक का आयोजन किया गया. बैठक में जिला यक्ष्मा पदाधिकारी (डीटीओ) डॉ आरके जायसवाल शामिल हुए. उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों और स्वास्थ्य कर्मियों को यक्ष्मा (टीबी) से संबंधित विस्तृत जानकारी दी. बताया कि इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य टीबी मरीजों की संख्या में कमी लाना और समय पर पहचान कर इलाज सुनिश्चित करना है. डॉ जायसवाल ने कहा कि भारत में हर वर्ष लगभग 25 लाख लोग टीबी से ग्रसित होते हैं, जिनमें करीब चार लाख लोगों की मौत हो जाती है. यह बीमारी खांसने या छींकने से फैलती है और समय पर इलाज नहीं होने पर जानलेवा साबित हो सकती है. उन्होंने बताया कि 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोग, कुपोषित व्यक्ति, डायबिटीज के मरीज, एचआइवी संक्रमित, धूम्रपान व शराब का सेवन करने वाले, पहले टीबी से ग्रसित रह चुके लोग, मरीज के संपर्क में रहने वाले व्यक्ति और जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है, उनमें टीबी का खतरा अधिक रहता है. टीबी के प्रमुख लक्षणों में रात में पसीना आना, छाती में दर्द, लगातार खांसी, खांसी में खून आना, वजन कम होना, भूख न लगना और बुखार शामिल हैं. उन्होंने जोर देते हुए कहा कि मरीजों की जल्द पहचान कर जांच और इलाज शुरू करना बेहद जरूरी है. बैठक में प्रमुख फुलवा देवी, चिकित्सा प्रभारी अविनाश कुमार, पंसस कृष्णा राम, रितेश ठाकुर, मुखिया बेबी देवी, अनिकेत नायक, हेल्थ मैनेजर मृत्युंजय सिंह, एसटीएस दीपक केरकेट्टा सहित स्वास्थ्यकर्मी उपस्थित थे.
यक्ष्मा उन्मूलन पर जोर
यक्ष्मा उन्मूलन को लेकर 100 दिनों के विशेष कार्यक्रम के तहत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में बैठक
