चौपारण. प्रखंड के ग्रामीण इलाकों में कमजोर इंटरनेट नेटवर्क इन दिनों आंगनबाड़ी सेविकाओं के लिए परेशानी का सबब बन गया है. सरकार की ओर से लाभुकों को मिलने वाले पोषाहार वितरण को अब ऑनलाइन प्रक्रिया से जोड़ दिया गया है. जिसमें फेस कैप्चर अनिवार्य कर दिया गया है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि नेटवर्क की सुस्ती के कारण एक लाभुक का फेस कैप्चर करने में ही घंटों लग जा रहे हैं. चौपारण के कई पंचायतों में मोबाइल नेटवर्क काफी सुस्त है. कभी सिग्नल आता है, तो कभी पूरी तरह गायब हो जाता है. ऐसे में दर्जनों लाभुकों का डेटा अपलोड करना और फेस कैप्चर करना बेहद कठिन हो जा रहा है. कई बार लाभुकों को लंबे समय तक केंद्र पर इंतजार करना पड़ता है. जिससे महिलाओं और छोटे बच्चों को असुविधा होती है. कभी कभार ऐसा भी होता है कि घंटों इंतजार के बाद भी उनका फेस कैप्चर नहीं हो पाता है और लाभुक बिना पोषाहार का पैकेट लिए घर लौट जा रही हैं. लाभुकों ने बताया कि पोषाहार लेने आयी गर्भवती महिलाएं और धातृ माताएं घंटों बैठी रहती हैं, लेकिन तकनीकी दिक्कतों के कारण वितरण में देरी हो जाती है. सेविकाएं भी दबाव में काम कर रही हैं. ऑनलाइन एंट्री पूरी नहीं होने पर जवाबदेही उन्हीं पर तय की जाती है. स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि पहले ग्रामीण क्षेत्रों में नेटवर्क व्यवस्था दुरुस्त की जाये या फिर ऑफलाइन विकल्प उपलब्ध कराया जाये. ताकि पोषाहार वितरण की व्यवस्था सुचारु रूप से चल सके. लाभुकों को अनावश्यक परेशानी न झेलनी पड़े.
कमजोर नेटवर्क के कारण पोषाहार वितरण में परेशानी
आंगनबाड़ी सेविकाओं को एक फेस कैप्चर करने में लग रहे घंटों
