हजारीबाग. पूर्व सांसद भुवनेश्वर प्रसाद मेहता ने कहा कि रैयतों एवं प्रभावित ग्रामीणों को उचित मुआवजा दिया जाना चाहिए. विस्थापन से जुड़े नियमों का पालन पूरी पारदर्शिता के साथ किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि सरकारी कार्यालयों में भ्रष्टाचार बढ़ता जा रहा है. लोगों को छोटे-मोटे कार्य के लिए भी कार्यालयों का चक्कर काटना पड़ रहा है. पूर्व सांसद ने कहा कि भवन निर्माण, पथ प्रमंडल व ग्रामीण विकास विभाग से निकलने वाले टेंडरों में पारदर्शिता का अभाव है. सरकारी योजनाओं में भारी गड़बड़ी हो रही है. श्री मेहता ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि यही स्थिति बनी रही, तो उन्हें बाध्य होकर आंदोलन का रुख करना पड़ेगा. उन्होंने प्रशासन से मांग की कि ग्राम सभा और त्रिपक्षीय वार्ता के नाम पर कथित दबाव और हिंसा की निष्पक्ष जांच करायी जाये. उन्होंने 10000 करोड़ घोटाले की भी जांच की मांग की. कहा कि 21 लाख हेक्टेयर गैर मजरूआ जमीन को पूर्व मुख्यमंत्री ने लैंड बैंक में डाल दिया है. इसमें से अधिकांश जमीन गरीब व आदिवासी की है. इसे जल्द से जल्द हटा कर रसीद काटने की अनुमति दी जाये. उन्होंने आरोप लगाया कि बड़कागांव की कोल कंपनियां बाहरी लोगों की भीड़ इकट्ठा कर रैयतों और ग्रामीणों के साथ मारपीट कराती हैं, जो निंदनीय है. प्रेस वार्ता में महेंद्र मुखिया, मोहम्मद हाकिम, निजाम अंसारी, माजिद अंसारी, अशोक राम, विजय मिश्रा, शमीम खान, अधिवक्ता शंभु कुमार, राजू खान, कुंजील साव, शौकत अनवर सहित कम्युनिस्ट पार्टी के कई कार्यकर्ता उपस्थित थे.
विस्थापन नियमों के पालन में पारदर्शिता जरूरी : मेहता
रैयतों को उचित मुआवजा देने की मांग
