टाटीझरिया. वन विभाग की कथित मिलीभगत और भू-माफियाओं के बढ़ते हौसले के कारण बेडम पंचायत के हेसाकोचा-भेडीबार जंगल का अस्तित्व खतरे में है. करीब पांच एकड़ से अधिक क्षेत्र में फैले सखुआ के पेड़ों को काट दिया गया है. वन भूमि पर जेसीबी चलाकर खेत और मकान बना लिये गये हैं. ग्रामीणों के विरोध और वन विभाग के कागजी दावों के बीच जंगल की कटाई अब भी धड़ल्ले से जारी है, जिससे स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है. रविवार को इस मामले को लेकर बड़ी संख्या में ग्रामीण हेसाकोचा-भेडीबार जंगल पहुंचे. वहां बेडम पंचायत के मुखिया प्रतिनिधि बिनोद हेंब्रम और पंसस प्रतिनिधि नरेश हेंब्रम की मौजूदगी में आपात बैठक हुई. बैठक के दौरान ग्रामीणों ने वन भूमि पर हुए अतिक्रमण और पेड़ों की कटाई पर कड़ा विरोध दर्ज कराया. कहा कि वन भूमि को समतल करने के लिए खुलेआम जेसीबी मशीन का उपयोग किया गया और वहां खेती के लिए जमीन तैयार कर ली गयी. बैठक में उस वक्त सब भौंचक रह गये, जब कालीराम मरांडी के परिजनों ने खुलेआम स्वीकार किया कि उन्होंने इस काम के लिए वन विभाग के कर्मियों को 25 हजार रुपये की रिश्वत दी है. इस खुलासे के बाद ग्रामीणों का गुस्सा और भड़क गया. ग्रामीणों का कहना है कि वन विभाग की नाक के नीचे पेड़ काटे जा रहे हैं, लेकिन विभाग सुस्त पड़ा हुआ है. ग्रामीणों ने वन विभाग के वरीय अधिकारियों से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने, दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करने और वन भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने की मांग की है. वनाधिकारी शैलेश पांडेय ने कहा कि यह मामला वन विभाग के संज्ञान में है. विभाग द्वारा मामला दर्ज किया गया है. कानून का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है.
जंगल में कट रहे सखुआ के पेड़, ग्रामीणों में आक्रोश
वन कर्मियों को रिश्वत देने का आरोप, जांच की मांग तेज
